देश की राजधानी दिल्ली महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं हैं। इससे जुड़े कुछ आंकड़े सामने आए हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सिर्फ जनवरी में रेप के 140 मामले दर्ज करवाए गए हैं। इसके अलावा महीने भर में ही छेड़छाड़ के 238 मामले सामने आए। रेप के कुल मामलों में 43 को अबतक नहीं सुलझाया जा सका है। वहीं छेड़छाड़ के कुल मामलों में अनसुलझे मामलों की संख्या 133 है। अगर बात 2016 की करें तो तब बलात्कार के कुल 2,155 मामले दर्ज करवाए गए। जिसमें से 291 को अबतक नहीं सुलझाया जा सका है। इसके अलावा पिछले साल छेड़छाड़ के 4,165 मामले दर्ज करवाए गए थे जिसमें से 1,132 मामले अबतक अनसुलझे हैं।

बलात्कार के कुछ ऐसे मामले भी हैं जिनमें पुलिसवालों का नाम आया। 2014, 2015 और 2016 में कुल मिलाकर बलात्कार के कुल 36 मामले ऐसे थे जिसमें दिल्ली पुलिस के किसी कर्मी का नाम आया। इसमें से 28 दिल्ली में रजिस्टर थे और बाकी आठ दिल्ली से बाहर बाकी राज्यों के थानों में दर्ज थे। इसमें से दो मामलों को रद्द कर दिया गया। वहीं छह में आरोपी पुलिस वाले को दोषमुक्त कर दिया गया। लेकिन अबतक 28 मामले लंबित हैं। किसी में जांच नहीं हुई है तो किसी का ट्रायल होना बाकी है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस कर्मी पर छेड़छाड़ और शोषण के 99 और मामले दर्ज हैं। ये आंकड़े भी पिछले तीन सालों के हैं।

ये आंकड़े गृह राज्य मंत्री हंस राज अहीर ने राज्य सभा में प्रश्न काल के दौरान प्रस्तुत किए। मंत्री ने कहा, ‘हर केस के सॉल्व ना होने का अपना अलग कारण है। कुछ में आरोपी की पहचान ही नहीं हो पाती। कुछ में आरोपी भाग जाता है।

दिल्ली में जनवरी में रोज औसतन पांच बलात्कार

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