आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के तहत निजी अस्पतालों में 10 फीसद बेड गरीबों के लिए आरक्षित रखने के नियम का पालन नहीं करने और गरीब मरीजों का इलाज नहीं करने पर दिल्ली सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार किया है।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय पांच बड़े निजी अस्पतालों से करीब एक हजार करोड़ रुपये की वसूली करेगा। इस बाबत फोर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट, धर्मशीला कैंसर इंस्टीट्यूट, साकेत स्थित मैक्स, पुष्पावती सिंघानिया व शांति मुकुंद अस्पताल को नोटिस जारी कर पैसा जामा कराने का निर्देश दिया है। महानिदेशालय ने अकेले फोर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट को 503 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

दिल्ली के स्वास्थ्य सचिव डॉ. तरुण सीन ने कहा कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत गरीब मरीजों के इलाज के लिए उन निजी अस्पतालों में जितने बेड आरक्षित होने चाहिए वह नहीं हुए। इसके चलते यह कार्रवाई की गई है। खास बात यह है कि पहली बार निजी अस्पतालों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की गई है।

महानिदेशालय के अनुसार अधिवक्ता अशोक अग्रवाल की याचिका पर वर्ष 2007 में हाई कोर्ट ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत मरीजों का इलाज नहीं करने वाले अस्पतालों से पैसा वसूल करने का निर्देश दिया था। तब आदेश में कहा गया था कि गरीब मरीजों के लिए बेड आरक्षित नहीं करने वाले अस्पतालों ने जो मुनाफा कमाया उनसे गरीबों के इलाज का खर्च वसूल करे।

उस आदेश के इतने सालों बाद अब महानिदेशालय ने सख्त कदम उठाया है। फोर्टिस को वर्ष 1984 से 2007 तक गरीब मरीजों का इलाज नहीं करने के लिए 503 करोड़ रुपये महानिदेशालय के खाते में जामा करने के निर्देश दिए गए हैं। महानिदेशालय अस्पतालों से जो पैसा वसूल करेगा उसे गरीब मरीजों के इलाज पर ही सरकारी अस्पतालों में खर्च किया जाएगा।

हाईकोर्ट जाएगा फोर्टिस

फोर्टिस हेल्थकेयर प्रबंधन का कहना है कि महानिदेशालय से जिस पैसे की मांग की गई है वह एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट के अधिग्रहण के पहले से संबंधित है। इस मामले को फोर्टिस प्रबंधन दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देगा। दिल्ली सरकार ने करीब 43 प्राइवेट अस्पतालों को सस्ती दरों पर भूखंड आवंटित किए थे। भूखंड आवंटन की शर्तों के मुताबिक सभी अस्पतालों में 10 फीसद बेड गरीब मरीजों के लिए आरक्षित रखना है।

 

दिल्ली के पांच निजी अस्पतालों से होगी एक हजार करोड़ की वसूली

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