telangana-ap-fight_22_08_2016

हैदराबाद। आंध्र प्रदेश पुनर्गठन कानून 2014 के तहत शेड्यूल x के तहत रखे गए कॉमन संस्‍थानों पर नियंत्रण के लिए तेलंगाना राज्‍य सरकार सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई जारी रखेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में तेलंगाना की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी। उस याचिका में मांग की गई थी कि आंध्र प्रदेश स्‍टेट काउंसिल ऑफ हायर एजुकेशन की संपति और देनदारियों को जनसंख्‍या के अनुपात में दोनों राज्‍य बराबरी से साझा करें।

बावजूद इसके तेलंगाना सरकार शीर्ष अदालत में एक उपचारात्मक याचिका (क्यूरेटिव पिटीशन) दायर करने की योजना बना रहा है। तेलंगाना राज्‍य सरकार को इन संस्‍थानों पर नियंत्रण पाने के लिए करीब 35 हजार करोड़ रुपए आंध्र प्रदेश सरकार को देने होंगे।

क्‍यूरेटिव पिटीशन आखिरी न्‍यायिक विकल्‍प होती है। आमतौर पर चेंबर में बैठकर जज इसका फैसला कर देते हैं। कुछ दुर्लभ मामलों में ही खुली अदालतों में क्‍यूरेटिव पिटीशन की सुनवाई होती है।

उपचारात्मक याचिका की अवधारणा सबसे पहले रूपा अशोक हुर्रा के मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से विकसित की गई थी। इसके तहत कहा गया था कि क्‍या सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के खिलाफ कोई पीड़ि‍त व्‍यक्‍ति‍ राहत का हकदार है, जबकि उसकी समीक्षा याचिका खारिज कर दी गई हो।

कानून विभाग ने तेलंगाना स्‍टेट काउंसिल ऑफ हायर एजुकेशन (TSCHE) को उपचारात्‍मक याचिका दायर करने की सलाह दी है। TSCHE के चेयरमैन टी रेड्डी ने कहा कि वह जल्‍द ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

तेलंगाना को देना होगा 35 हजार करोड़

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