इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की है कि तीन बार तलाक कहना ‘‘क्रूरता’’ है और इससे न्यायिक अंतरात्मा ‘परेशान’ है। अदालत ने पूछा कि क्या मुस्लिम महिलाओं की यातना खत्म करने के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ में संशोधन किया जा सकता है। इस प्रथा पर प्रहार करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा है कि इस तरह से ‘तुरंत तलाक’ देना ‘सबसे ज्यादा अपमानजनक’ है जो ‘भारत को एक राष्ट्र बनाने में ‘बाधक’ और पीछे ढकेलने वाला है।’ न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की एकल पीठ ने पिछले महीने अपने फैसले में कहा, ‘जो सवाल अदालत को परेशान करता है वह यह है कि क्या मुस्लिम पत्नियों को हमेशा इस तरह की स्वेच्छाचारिता से पीड़ित रहना चाहिए? क्या उनका निजी कानून इन दुर्भाग्यपूर्ण पत्नियों के प्रति इतना कठोर रहना चाहिए? क्या इन यातनाओं को खत्म करने के लिए निजी कानून में उचित संशोधन नहीं होना चाहिए? न्यायिक अंतरात्मा इस विद्रूपता से परेशान है।’ उन्होंने कहा, ‘भारत में मुस्लिम कानून पैगम्बर या पवित्र कुरान की भावना के विपरीत है और यही भ्रांति पत्नी को तलाक देने के कानून का क्षरण करती है।’

अदालत ने पांच नवम्बर को दिए गए फैसले में कहा, ‘मुस्लिम पति को स्वेच्छाचारिता से, एकतरफा तुरंत तलाक देने की शक्ति की धारणा इस्लामिक रीतियों के मुताबिक नहीं है। यह आम तौर पर भ्रम है कि मुस्लिम पति के पास कुरान के कानून के तहत शादी को खत्म करने की स्वच्छंद ताकत है।’ अदालत ने कहा, ‘पूरा कुरान पत्नी को तब तक तलाक देने के बहाने से व्यक्ति को मना करता है जब तक वह विश्वासनीय और पति की आज्ञा का पालन करती है।’ इसने कहा, ‘इस्लामिक कानून व्यक्ति को मुख्य रूप से शादी तब खत्म करने की इजाजत देता है जब पत्नी का चरित्र खराब हो, जिससे शादीशुदा जिंदगी में नाखुशी आती है। लेकिन गंभीर कारण नहीं हों तो कोई भी व्यक्ति तलाक को उचित नहीं ठहरा सकता चाहे वह धर्म की आड़ लेना चाहे या कानून की।’ अदालत ने 23 वर्षीय महिला हिना और उम्र में उससे 30 वर्ष बड़े पति की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। हिना के पति ने ‘अपनी पत्नी को तीन बार तलाक देने के बाद’ उससे शादी की थी। पश्चिम उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले दंपति ने अदालत का दरवाजा खटखटाकर पुलिस और हिना की मां को निर्देश देने की मांग की थी कि वे याचिकाकर्ताओं का उत्पीड़न बंद करें और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

 

तीन बार तलाक कहना ‘क्रूरता’ : इलाहाबाद हाई कोर्ट

| इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश | 0 Comments
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