विधानसभा चुनावों की मौजूदा प्रकिया खत्म होने के बाद केंद्र सरकार संभवत: ‘तीन तलाक’ को प्रतिबंधित करने के संबंध में अहम कदम उठा सकती है। केंद्रीय विधि मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने इस आशय का स्पष्ट संकेत देते हुए सपा, कांग्रेस और बसपा को इस विवादित मुद्दे पर अपना रुख साफ करने को कहा।

प्रसाद ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा किसी धर्म या आस्था से नहीं बल्कि महिलाओं के सम्मान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि हम आस्था का सम्मान करते हैं लेकिन उपासना पद्धति और कुप्रथा साथ साथ नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि एक साथ तीन बार तलाक बोलने की यह कुप्रथा महिलाओं से उनका सम्मान छीन लेती है। उन्होंने कहा कि केंद्र इस ‘कुप्रथा को समाप्त करने को प्रतिबद्ध है।’

संवाददाता सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद सरकार तीन तलाक प्रतिबंधित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम उठा सकती है। उत्तर प्रदेश और चार अन्य राज्यों में चल रही विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया 11 मार्च को परिणाम आने के साथ समाप्त होगी।

महिलाओं के जीवन और सम्मान को चोट पहुंचाने वाली इस प्रथा को बंद किए जाने की जरूरत पर जोर देते हुए प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार का रुख पूछा था जिस पर हमारी तरफ से तीन आधार बनाकर जवाब दिया गया है… न्याय, समानता और महिलाओं का सम्मान। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि हम एकमात्र पार्टी हैं जो महिलाओं का सम्मान करती है। अन्य दल न तो महिलाओं को अच्छी जगह देते हैं, और न ही उनका सम्मान करते हैं। लखनऊ में इसी मुद्दे को लेकर अपने वार पैने करते हुए प्रसाद ने कहा कि मैं कहता हूं कि अखिलेश, राहुल और मायावती जी तीन तलाक के मुद्दे पर अपने रुख स्पष्ट करें।

भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में तीन तलाक के मुद्दे पर प्रदेश की मुसलिम महिलाओं से राय लेकर सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने का वादा किया है। तीन तलाक राजनीतिक मुद्दा नहीं है लेकिन राहुल, अखिलेश और मायावती इस पर महिलाओं से कोई राय नहीं लेंगे, क्योंकि उन पर तुष्टीकरण की राजनीति हावी है। उन्होंने तीन तलाक को एक शोषणकारी प्रावधान बताते हुए कहा कि यह सवाल किसी ईमान या धर्म का नहीं बल्कि नारी न्याय, नारी समानता और नारी सम्मान का है। कोई भी कुप्रथा किसी आस्था का हिस्सा नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि दुनिया के 20 इस्लामी देश तीन तलाक की प्रथा को समाप्त कर चुके हैं। वहां इसे शरीयत में दखलंदाजी नहीं माना गया। ऐसे में भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में इस रिवाज को खत्म किया जाना शरीयत के खिलाफ कैसे हो सकता है।

तीन तलाक पर रोक के संबंध में बड़ा कदम उठा सकती है BJP : रविशंकर प्रसाद

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