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आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के लिए भारत में भर्ती का काम देखने वाले आतंकी मोहम्मद शफी अर्मर के मारे जाने की खबर है। बताया जा रहा है कि कुछ दिनों पहले सीरिया में अमेरिकी ड्रोन हमले में उसकी मौत हो गई है।

मोहम्मद शफी का दूसरा नाम यूसुफ है। यूसुफ को आइएस सरगना अबू बकर बगदादी का दाहिना हाथ माना जाता है। मोहम्मद शफी या यूसुफ को बगदादी ने भारत में आईएस का काम देखने को कहा था और वो भारतीय युवकों को आईएस से जुड़ने के लिए प्रेरित करता रहता था।

बताया जाता है कि उसने करीब 30 युवकों की आईएस के लिए भर्ती की थी और उसकी मंशा भारत के सभी राज्यों में आईएस की यूनिट खोलने की थी। एटीएस और एनआईए की गिरफ्त में आए आतंकियों से इस जानकारी की पुष्टि भी हुई थी। एनआईए ने महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और उत्तर प्रदेश से आईएस से जुड़े आतंकियों की धरपकड़ भी की थी।

खुफिया अधिकारियों का कहना है कि शफी अर्मर की मौत के बाद भारत में आईएस की मौजूदगी को खत्म करने में और मदद मिलेगी। शफी अर्मर कर्नाटक के भटकल का रहने वाला था। शफी के भाई सुल्तान अर्मर की साल 2015 में ड्रोन हमलों में मौत हो गई थी।

इंटरपोल में वांछित शफी अर्मर ने अंसार-उल-तौहीद को भंग कर जुनुद-अल खलीफा-ए-हिंद का गठन किया था। अंसार-उल-तौहीद दरअसल इंडियन मुजाहिद्दीन से जुड़ा हुआ था, लेकिन रियाज भटकल और इकबाल भटकल से विरोध के चलते वो अलग हो गया। कुछ समय बाद शफी और उसके भाई ने आईएस से अपने को जोड़ लिया और भारत में ये आतंकियों की भर्ती में जुट गए।

 

ड्रोन हमले में आईएस से जुड़े भारतीय सरगना की सीरिया में मौत

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