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रियो ओलिंपिक में भारत के लिए कुश्ती में मेडल की उम्मीद माने जा रहे रेसलर नरसिंह यादव पर डोपिंग के केस में 4 साल का बैन लगा है। शुक्रवार को नरसिंह के पहले बाउट से ठीक 12 घंटे पहले ब्राजील के कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट्स (CAS) ने यह फैसला सुनाया। अब नरसिंह रियो ओलिंपिक में नहीं खेल सकेंगे। बैन लगने के बाद नरसिंह ने कहा कि देश को मेडल दिलाने के मेरे सपने को छीन लिया गया। वहीं, नरसिंह के परिवार ने नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगाई है। चार घंटे चली बहस, नाडा की अपील खारिज

– बता दें कि वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (WADA) ने नरसिंह यादव को क्लीन चिट दिए जाने के फैसले पर नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (NADA) के खिलाफ CAS में अपील दायर की थी।

– CAS में करीब चार घंटे लंबी बहस चली, जिसके बाद नरसिंह पर चार साल का बैन लगा दिया गया। कोर्ट ने कहा- नाडा का फैसला सही नहीं है। नरसिंह के खाने-पीने में मिलावट की बात साबित नहीं होती।

– कोर्ट ने नरसिंह के उस तर्क को भी मानने से इनकार कर दिया कि उनके साथ साजिश हुई है, क्योंकि इसे साबित करने के लिए नरसिंह यादव के पास कोई सबूत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ट्रेनिंग सेंटर में इतनी सिक्युरिटी के बीच कोई कैसे उनके खाने में मिलावट कर सकता है?

नरसिंह ने कहासाबित करूंगा कि मैं बेकसूर हूं

– नरसिंह ने कहा, ”ये कहना है कि मैं कोर्ट के फैसले से टूट गया हूं, काफी हल्की बात होगी। मैंने रेसलिंग की मैट से बाहर की दुनिया में पिछले दो महीने में काफी कुछ सहा है। बैन के फैसले ने देश के लिए रियो ओलिंपिक में मेडल जीतने का मेरा सपना बेदर्दी से छीन लिया। और ये सब मेरे पहले बाउट से महज 12 घंटे पहले हुआ। लेकिन मैं खुद को बेकसूर साबित करने के लिए जो कुछ हो सकेगा, वह करूंगा।”

WHAT NEXT
– नरसिंह के रियो में खेलने का अब कोई चांस नहीं है। लेकिन वे 4 साल के बैन के खिलाफ अपील कर सकते हैं।
– नरसिंह के स्पॉन्सर जेएसडब्ल्यू स्पोर्ट्स ने कहा है कि आर्बिट्रेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए हम नरसिंह की पूरी मदद करेंगे।

2 टेस्ट में फेल हुए थे नरसिंह

– नरसिंह 25 जून और 5 जुलाई को हुए डोप टेस्ट में फेल हो गए थे। 24 जुलाई को मामले का खुलासा होने के बाद ये विवाद बढ़ा।

– नाडा की जांच में नरसिंह यादव के शरीर में स्टेरॉयड पाया गया, जिसका इस्तेमाल मांसपेशियों का भार और ताकत बढ़ाने के लिए किया जाता है। इस स्टेरॉयड को वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी यानी WADA ने भी बैन ड्रग की लिस्ट में डाल रखा है।

– नरसिंह के निजी रसोइए चंदन और साई सेंटर, सोनीपत के दो मेसकर्मियों विनाेद और राजेश ने नाडा में बयान दिया था कि खाने में मिलावट हुई थी।

इन वजहों से नाडा से बरी हुए थे नरसिंह
1. नरसिंह की कोई गलती नहीं और न ही उन्होंने कोई लापरवाही बरती है। वे कॉम्पिटीटर की साजिश के शिकार हुए।
2. प्रैक्टिस के दौरान खाने या पानी पर हर समय निगाह रखना मुमकिन नहीं है। 2 जून से पहले का नरसिंह का कोई भी सैम्पल पॉजिटिव नहीं पाया गया।
4. जिस प्रतिबंधित मेथाॅयडिएनोन के इस्तेमाल का आरोप लगा, वह वजन बढ़ाने वाली थी। नरसिंह का वजन 81 किलोग्राम था और उन्हें लड़ना था 74 किलोग्राम वजन वर्ग में। ऐसी स्थिति में कोई खुद से ओलिंपिक से ठीक पहले वजन बढ़ाने वाले स्टेरॉयड क्यों लेगा?
5. नरसिंह के पार्टनर संदीप तुलसी यादव का भी डोप में पकड़ा जाना, जबकि उन्हें हाल-फिलहाल में किसी टूर्नामेंट खेलना ही नहीं है।

डोपिंग केस से पहले क्या थी विवाद की जड़?
– 2012 ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले योगेश्वर दत्त 60 Kg वेट कैटेगरी, सिल्वर जीतने वाले सुशील 66 Kg वेट कैटेगरी और नरसिंह 74 Kg वेट कैटेगरी में खेले थे।
– दिसंबर 2013 में इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एसोसिएटेड रेसलिंग स्टाइल्स (FILA) ने नियम बदले।
– इसमें FILA ने रियो ओलिंपिक के लिए नई वेट कैटेगरी का एलान किया।
– इसके बाद योगेश्वर 65 Kg वेट कैटेगरी में खेलने लगे। सुशील 74 Kg वेट कैटेगरी में आ गए, जिसमें नरसिंह सालों से खेलते आ रहे थे।
– नियम के मुताबिक, एक वेट कैटेगरी से एक देश से एक ही रेसलर ओलिंपिक में जा सकता है। यहीं से विवाद की नींव पड़ी।

 

डोपिंग केस में नरसिंह पर 4 साल का बैन; रेसलर बोले- देश के लिए मेडल जीतने का मेरा सपना बेदर्दी से छीन लिया

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