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लखनऊ.ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बोर्ड के कुछ फैसले सार्वजनिक किए हैं। इसमें उसने साफ तौर पर कहा कि इस्लामिक शरीयत की हिफाजत करने में वह पीछे नहीं हटेगा। वहीं, बोर्ड के शायरा बानो केस में विरोधी पक्ष बनने का फैसले लेने के बाद एक बार फिर शाह बानो केस जैसी स्थिति बन गई है। बोर्ड ने फैसला लिया है कि वह तीन बार तलाक कहकर तलाक लिए जाने के इस्लामिक ट्रेडिशन में किसी भी तरह के बदलाव या छेड़छाड़ का सुप्रीम कोर्ट में विरोध करेगा। मामले की सुनवाई मर्इ में हो सकती है। बता दें, 80 के दशक में भी शाह बानो केस ने देश में काफी हलचल मचाई थी।

क्या है शायरा बानो केस
– उत्तराखंड निवासी शायरा बानो ने तीन बार तलाक कहकर तलाक लिए जाने की इस्लामिक प्रथा को असंवैधानिक घोषित करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक पि‍टीशन फाइल की थी।

– कोर्ट ने पिछले महीने इस पिटीशन को स्वीकार कर लिया।

– साथ ही कोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की जरूरतों पर गौर करने का भी फैसला लिया।

– अब मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने केस में विरोधी पक्ष बनने का फैसला किया है।

सरकारी स्कूल में धर्म विशेष की तालीम के विरोध में बोर्ड

– शनिवार को लखनऊ में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौलाना जफरयाब जिलानी ने बताया कि मौलाना वली रहमानी को बोर्ड का जनरल सेक्रेटरी और मौलाना शाह फजले रहीम को सचिव बनाया गया है।

– किसी भी सरकार को पर्सनल लॉ बोर्ड के मामलों में दखल न देने की अपील की गई है।

– उन्होंने बताया कि बोर्ड की कमेटियों के काम से बोर्ड संतुष्ट है।

– इसके अलावा बोर्ड तीन तलाक, हलाला और एक से ज्यादा शादियों के मसले पर बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखेगा। ट्रिपल तलाक को रद्द करने के किसी भी कदम का विरोध करेगा।

– बोर्ड किसी भी सरकारी स्कूल में किसी भी धर्म की तालीम के खिलाफ है।

– कुछ लीडर मुसलमानों को बोर्ड में शामिल करना चाहते हैं।

– इसके अलावा बोर्ड सामाजिक सुधारों पर भी फोकस करेगा।

– इसमें इस्लाम में औरतों का बड़ा मुकाम है, इस बात का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

– इसलिए महिलाओं के प्रति सामाजिक सुधारों में शादी को आसान बनाना, बिना दहेज की शादी को प्रमोट करना शामिल है।

– इसके अलावा धार्मिक सौहार्द बढ़ाने के लिए सभी धर्मों के लीडर्स को साथ में लेकर काम किया जाएगा।

– कॉन्फ्रेंस में जिलानी के अलावा मौलाना रशीद फरंगी महली, डॉ. असमा जाहिरा और बदायूं से वर्किंग कमि‍टी के मेंबर डॉ. यासीन अली मौजूद थे।

-वहीं, यहां मौजूद हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने कहा था कि बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट के सामने एक मजबूत पक्ष पेश करने के लिए सबसे अच्छे वकीलों की सेवा लेनी चाहिए।

क्या था शाह बानो केस?

– 1985 में इंदौर निवासी तलाकशुदा मुस्लिम महिला शाह बानो (62) ने सुप्रीम कोर्ट में एक केस किया था।

– उन्‍होंने अपने पति पर केस कर तलाक के बाद गुजारा भत्ता दिए जाने की मांग की थी। कोर्ट ने शाहबानो के हक में फैसला सुनाया था।

– इसके बाद राजीव गांधी की कांग्रेस सरकार ने इस्लामिक रुढ़िवादिता और मुस्लिम वर्ग के दबाव में आकर मुस्लिम महिला (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन डिवोर्स) अधिनियम 1986 पास कर दिया था।

– इस अधिनियम के द्वारा सुप्रीम कोर्ट का शाहबानो के पक्ष में सुनाया गया फैसला खारिज हो गया।

– अधिनियम ने निराश्रित और लाचार मुस्लिम महिलाओं से भी तलाक के बाद गुजारा भत्ता पाने का अधिकार छीन लिया।

 

ट्रिपल तलाक के सपोर्ट में मुस्लिम लॉ बोर्ड, इस्लामिक ट्रेडिशन में बदलाव का करेगा विरोध

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