ट्रंप ऑर्गेनाइजेशन ने भारत, ब्राजील और अर्जेंटीना के साथ चलने वाली कारोबारी बातचीत को रद्द कर दिया है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कार्यभार संभालने के लिए 3 सप्ताह से भी कम समय बचा है और उन्होंने भावी प्रोजेक्टों से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं।

ट्रंप के वकील एलन गार्टेन ने बताया कि कंपनी ने स्थानीय पार्टनरों के साथ रियो दे जेनेरियो में संभावित कार्यालय को लेकर होने वाली चर्चा का एमओयू रद कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी ने ब्राजील व अर्जेंटीना के साथ भारत के पुणे में चल रहे प्रोजेक्टों पर होने वाली प्रारंभिक बातचीत को भी रद कर दिया है।

हालांकि कंपनी द्वारा गुड़गांव में भी कुछ प्रोजेक्ट चल रहे हैं, लेकिन फिलहाल उन पर अलग से कोई ब्यौरा उपलब्ध नहीं हो पाया है। ट्रंप द्वारा यह बातचीत रद्द करने के पीछे उस दबाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है जो पिछले साल ब्राजील, अर्जेंटीना व पड़ोसी जॉर्जिया में होटलों के लाइसेंस को लेकर बनाया गया था।

कहा गया था कि ट्रंप को नए दफ्तर में जाने से पहले अपने कारोबार को अलग करना चाहिए। हालांकि अमेरिकी संविधान में ऐसा कोई नियम नहीं है कि राष्ट्रपति को उसका कारोबार या निवेश खत्म करना चाहिए, लेकिन आलोचकों के तर्क के आगे ट्रंप दबाव में इसलिए आ गए क्योंकि उनके संस्थान की जड़ें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन देशों में जमी हुई हैं जिनके साथ अमेरिका के अपने हित व संघर्ष भी जुड़े हुए हैं।

फिलहाल कारोबार बेचने के कोई संकेत नहीं
ट्रंप ने फिलहाल इस बात के कोई संकेत नहीं दिए हैं कि क्या उनकी योजना अपना कारोबार बेचने की है, लेकिन उन्होंने यह जरूर स्वीकार किया कि फिलहाल उनका इरादा किसी नई डील को अंजाम देने का नहीं है। उल्लेखनीय है कि ट्रंप अपना कारोबार दो वयस्क बेटों को सौंपकर व्हाइट हाउस जा रहे हैं। ट्रंप की करीब 20 देशों में 500 कंपनियां हैं, जिनमें भारत की गुड़गांव व पुणे के प्रोजेक्ट भी शामिल हैं।

ट्रंप ने भारत समेत 3 देशों से कारोबारी बातचीत की रद्द

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