चीन की मीडिया ने आगाह किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका में नौकरियां वापस लानेकी नीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी मेक इन इंडियाकार्यक्रम को चुनौती दे सकती है। हालांकि उसने यह भी कहा कि एशियाई साझेदारों के साथ अमेरिका के निरंतर संपर्क बनाए रखने का फायदा भारत-अमेरिका संबंधों को हो सकता है। सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्सएक लेख में कहा, ‘इसको लेकर अटकल लगाई जा रही है कि ट्रंप अपने यहां सरंक्षणवाद की नीतियों का अनुसरण करने के साथ भारत के बाजार में और अधिक पहुंच का आग्रह कर सकते हैं।

इस कदम से भारत को आउटसोर्स कर रही कंपनिया और भारतीय निर्यातकों प्रभावित होंगी खासकर आईटी और दवा क्षेत्र में इसका असर होगा। मौजूदा समय में भारत के पास दुनिया के सबसे अधिक शिक्षित, तकनीकी रूप से प्रशिक्षित लोग हैं। यही बात भारत को कुछ अमेरिकी कंपनियों के लिए आउटसोर्सिंग का सबसे पसंदीदा स्थान बनाती है। ट्रंप की अमेरिका में नौकरियां वापस लानेकी नीति मोदी के मेक इन इंडियाको एक चुनौती है।

इस लेख में कहा गया है, ‘ईरान को लेकर बात करें तो भारत अमेरिका परमाणु समझौते में बहुत सारे बदलाव नहीं चाहेगा। अमेरिका की ओर से पूर्व से लगाए गए प्रतिबंधों ने भारत और ईरान के बीच संपर्क को मुश्किल कर दिया और ईरान से भारत में आयात बहुत अधिक घट गया।

ट्रंप की रोज़गार नीति से मोदी के मेक इन इंडिया को मिल सकती है चुनौती

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