आर्थिक विकास के दम पर मजबूत फैसले ले रही केंद्र सरकार के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि के अनुमान उत्साहवर्द्धक नहीं है। केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) ने चालू वर्ष के लिए 7.1 फीसदी की विकास दर का अनुमान लगाया है जो कि एक साल पहले के 7.6 फीसदी के मुकाबले कम है।

सीएसओ द्वारा शुक्रवार शाम को जारी किये गए आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद में 7.1 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है। वर्ष 2015-16 में यह 7.6 फीसदी था। उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक की पिछली क्रेडिट पॉलिसी में केंद्रीय बैंक ने भी विकास दर के अनुमान को आधा फीसदी घटा कर 7.1 फीसदी कर दिया था। अर्थव्यवस्था में 7.1 फीसदी की विकास दर का अनुमान पिछले 3 साल का निचला स्तर है।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि चालू वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि के अनुमान में अधिकतर आंकड़े अप्रैल से अक्टूबर तक के ही शामिल किये गए हैं। मतलब है कि नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा, इसका अनुमान इसमें नहीं है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 8 नवंबर को 500 एवं 1000 रुपये के पुराने नोटों को चलन से हटाने की घोषणा की थी। इसके बाद से ही कुछ विशेषज्ञों ने कहा था कि इस कदम का अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और विकास दर में दो फीसदी तक की गिरावट हो सकती है।

जीडीपी में गिरावट, विकास दर 7.1 फीसदी रहने का अनुमान

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