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जापान में एक के बाद एक लगातार तीन दिन तीन बड़े भूकंप आए। शुक्रवार को देर रात दक्षिणी जापान के कुमामोटो शहर के करीब आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.1 रही। इससे पहले, रिक्टर स्केल 7.4 का भूकंप बताया गया था। इसके बाद जापान ने सुनामी का अलर्ट जारी किया जिसे फिर वापस ले लिया गया।

भूकंप से अबतक नौ लोगों की मौत हो चुकी है जबकि सैंकड़ो लोग घायल बताए जा रहे है। मरने वाले अधिकांश लोग मशिकी शहर के हैं। बचावकर्मियों ने छह घंटे बाद मलबे से एक आठ माह की बच्ची को सुरक्षित निकाला है।

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ अमेरिका के अनुसार भूकंप का केंद्र कुमामोटो शहर की सतह से 40 किलोमीटर नीचे है। हालांकि जापान के मौसम विभाग ने भूकंप के तीव्र झटकों से अरियेक सागर और यातुसुशीरो सागर में सुनामी की आशंका जताई थी।

सुनामी की एडवाइजरी के तहत समुद्री जल के खतरे को देखते हुए अरियेक और यातुसुशीरो सागर के तटवर्ती इलाके जल्द से जल्द छोड़ने को कहा गया। स्थानीय प्रसारणकर्ता एनएचके ने कहा कि एडवाइजरी के मुताबिक भूकंप के कारण समुद्र की लहरें एक मीटर (करीब 3.5 फीट) की ऊंचाई तक उठ सकती हैं। लेकिन, बाद में अलर्ट वापस ले लिया गया। भूगर्भ वैज्ञानिकों के मुताबिक अब अगले एक सप्ताह तक भूकंप के तीव्र झटकों की आशंका रहेगी।

इससे पूर्व गुरुवार को आए 6.4 रिक्टर स्केल के भूकंप से बिजली और पेयजल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। 130 से ज्यादा झटकों के बाद ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों ने फैक्ट्रियों को अस्थायी तौर पर बंद कर दिया।

गुरुवार रात को जापान के चार बड़े द्वीपों में से एक क्यूशु के कुमामोटो शहर के आसपास के क्षेत्रों में रिक्टर स्केल पर 6.4 तीव्रता का भूकंप आया था। इससे दर्जनों घर मलबे में तब्दील हो गए।

400 साल पुराने कुमामोटो कैसल को नुकसान पहुंचा है। एक ट्रेन पटरी से उतरने के कारण क्यूशु में शिंकंसन सुपरफास्ट ट्रेन सेवा को रोका गया। हाईवे पर भी कई जगह दरारें आई हैं।

परमाणु नियामक प्राधिकरण ने क्यूशु और शिकोकू स्थित संयंत्रों को सुरक्षित बताया है। उधर प्रधानमंत्री शिंजो एबी ने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा से सरकार पूरी सामर्थ्य के साथ निपट रही है। इससे पहले 11 मार्च, 2011 को रिक्टर पैमाने पर 9 तीव्रता वाले भूकंप से जापान में भारी तबाही हुई थी।

पिछले कुछ समय से जापान में लगातार आ रहा है भूकंप

– इस महीने की पहली तारीख को भी जापान में भूकंप आया था। इस भूकंप की तीव्रता भी रियेक्टर स्केल पर 6 मापी गई थी। इस घटना में किसी जानमाल के नुकसान की खबर नही मिली थी।

– 14 जनवरी को होक्कइदो के दक्षिणी छोर पर उराकावा शहर के नजदीक भूकंप आया था जिसकी प्रारंभिक तीव्रता 6.7 थी। भूकंप समुद्री तल के नीचे 50 किलोमीटर की गहराई पर केंद्रित था।

– 14 नवंबर 2015 को भी दक्षिण पश्चिमी जापान के क्यूशू तट पर 7.0 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिसके बाद कोगोशिमा प्रांत के दक्षिणी हिस्से में सुनामी की हल्की लहरें उठीं थी हालांकि मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने इस दौरान सुनामी की संभावना से इनकार किया था।

– 12 सितंबर को भी जापान के शहर टोक्यो में भूकंप के झटके महसूस कियए गए थे। हालांकि इसकी तीव्रता 5.4 थी और इस घटना में भी जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं मिली थी।

साल 2011 में जापान में आया था सबसे शक्तिशाली भूकंप

मार्च 2011 में जापान में 9 तीव्रता वाले भूकंप और उसके बाद सूनामी ने भारी तबाही मचाई थी। इस दौरान बड़े स्तर पर जानमाल का नुकसान हुआ था। भूकंप में 15 हज़ार से ज्यादा की मौत और 6 हज़ार से ज्यादा घायल हुए थे जबकि 3 हज़ार से ज्यादा लोग लापता हो गए थे। आपको बता दें कि यह 25 सालों में घटित हुई सबसे भीषण परमाणु आपदा थी। वर्ष 2011 में समुद्र में 9.0 तीव्रता के भीषण भूकंप की वजह से जबर्दस्त लहरें उठी थीं, जिसने स्कूलों सहित समूचे इलाके को लील लिया था।

 

जापान में लगातार तीन दिन तीन बड़े भूकंप

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