mukul-dwivedi_1464943163जवाहर बाग खाली कराने में शहीद हुए एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी आला अधिकारियों के कार्रवाई खुलकर न करने देने के कारण परेशान थे। अपने परिवार से भी वह इसे शेयर करते थे। पत्नी से भी कहा था। अपने करीबियों से भी वह कहते थे कि एक दिन यह जवाहर बाग मेरी जान ही ले लेगा।

10 दिन पहले अचानक पीएसी के जवानों के  साथ हुए टकराव के बाद उनका बीपी बढ़ गया था। बताया कि वे उस रात सो नहीं सके। इसके बाद अगले दिन दवा ली और बिहारीजी की शरण में गए।

छुट्टियों में मथुरा गया था परिवार 
मृदुल स्वभाव और हर किसी की समस्या को गंभीरता से सुनने वाले एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी का परिवार चार दिन पहले ही मथुरा आया था। पत्नी अर्चना द्विवेदी (अंजू) बेटे कौस्तुभ द्विवेदी और छोटे बेटे अयूब द्विवेदी गोलू के साथ गर्मियों की छुट्टी होने पर आई थी।

ढाई साल पहले सीओ सदर के पद पर रहते हुए मुकुल द्विवेदी का बरेली के लिए तबादला हो गया था। इससे पहले उनके दोनों बच्चे मथुरा के सेक्रेड हार्ट स्कूल में पढ़ते थे। सेक्रेड हार्ट स्कूल के कई कार्यक्रमों में मुकुल द्विवेदी बतौर मुख्य अतिथि भी शामिल हुए थे।

तबादला होने पर दोनों बच्चे बरेली चले गए। अब फरवरी माह में एसपी बनने पर मथुरा पोस्टिंग मिली। सेशन पूरा न होने तक बच्चे मां के साथ बरेली ही रह रहे थे। निकट के आवास में रह रहे एसपी देहात अरुण कुमार ने बताया कि सुबह-सुबह एसपी सिटी बच्चों के साथ क्रि केट खेलकर तनाव कम करते थे।

जवाहर बाग ले लेगा मेरी जान

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