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गरीबों की पहचान के राज्य सरकार के अनोखे प्रयोग का असर दिखने लगा है। पंचायतों में जुगाड़ लगाकर बीपीएल लिस्ट में शामिल साधनसंपन्न परिवार बेनकाब होने लगे हैं। हिमाचल सरकार ने बीपीएल सूची में शामिल परिवारों के घर के बाहर बीपीएल की प्लेट लगाने की मुहिम शुरू की है।

हर जिले में यह काम शुरू हो गया है। कांगड़ा के नूरपुर विकास खंड की सुखार पंचायत में इस मुहिम के दौरान रोचक तथ्य सामने आया। यहां के तीन परिवारों ने घर के बाहर बीपीएल की तख्ती लगाने से मना कर दिया। इन्होंने पंचायत की बीपीएल सूची से उनका नाम काटने को कह दिया है।

बताया जा रहा है कि ये परिवार साधन संपन्न है। साफ है कि साधन संपन्न होने के बावजूद अब इन परिवारों को घर के बाहर बीपीएल की तख्ती लगाने में शर्म रही है। सुखार पंचायत की प्रधान सोनिका कुमारी ने बताया कि पंचायत के तीन परिवारों ने घर के बाहर तख्ती लगवाने से मना कर दिया है।

इन परिवारों ने खुद कहा कि वे बीपीएल सूची से बाहर होना चाहते हैं। इस खुलासे के बाद तय है कि पंचायतों में आम सभा के दौरान बीपीएल परिवारों के चयन में किस स्तर तक धांधली होती है। पंचायत में 65 परिवार बीपीएल सूची में हैं।

सुखार पंचायत के जीत डढवाल, जयपाल, ओंकार सिंह और शाहद्दीन ने मांग की है कि जो लोग वर्षों से बीपीएल का लाभ ले रहे हैं, वे लोग बीपीएल से बाहर होने चाहिए और यह सूचना भी मुख्य गेट पर अंकित होनी चाहिए कि उक्त परिवार कब से बीपीएल में शामिल हैं।

बीडीओ नूरपुर कुलबंत सिंह ने बताया कि जिले भर में बीपीएल से संबंधित परिवारों की पहचान के लिए उनके घरों के आगे बीपीएल परिवार के नाम की प्लेट लगाई जा रही हैं।

 

 

 

घर के बाहर गरीबी की प्लेट लगी तो आई शर्म

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