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भारत सरकार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) पर अपने दावे को और मजबूत करने की तैयारी में है। इसके तहत जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में पीओके के लिए खाली सीटों को भरा जा सकता है। हालांकि कुछ कानूनी अड़चनें हैं, लेकिन बात बनी तो इन सीटों पर विदेशों में रह रहे पीओके के गणमान्य व्यक्तियों को मनोनीत किया जा सकता है।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीओके प्रतिनिधियों के लिए 24 सीटें खाली रखी जाती हैं। सरकार लोकसभा में भी पीओके को प्रतिनिधित्व देने पर विचार कर रही है।

आरपार की कूटनीतिक लड़ाई

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार सरकार अब पाकिस्तान के साथ कश्मीर मुद्दे को लेकर आर-पार की कूटनीतिक लड़ाई के मूड में है। इसके लिए गुलाम कश्मीर में कश्मीरियों के साथ हो रहे अत्याचार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित करने की हरसंभव कोशिश की जाएगी।

इसके लिए जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में पीओके के लिए छोड़ी गई सीटों के भरने पर विचार किया जा रहा है। लेकिन पाकिस्तान के कब्जे में होने के कारण अभी तक ये सीटें खाली छोड़ दी जाती थीं।

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सूत्रों की मानें तो पाकिस्तान को आईना दिखाने के लिए इन सीटों पर अब गुलाम कश्मीर के नुमाइंदों को मनोनीत किया जा सकता है। सरकार की यह है सोच सरकार की सोच यह है कि जम्मू-कश्मीर की विधानसभा के भीतर जब पीओके का व्यक्ति वहां आम कश्मीरियों के साथ हो रहे अत्याचार के बारे में बोलेगा तो घाटी के युवाओं को पाकिस्तान की साजिश अच्छे से समझ आएगी।

कानूनी अड़चनें भी

जम्मू-कश्मीर में पीओके के बाशिंदे को मनोनीत करने में फिलहाल कुछ कानूनी अड़चनें आ सकती हैं। राज्य विस में चुने हुए प्रतिनिधियों की व्यवस्था है, लेकिन मनोनीत प्रतिनिधि को शामिल करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। इसके लिए राज्य सरकार को विश्वास में लेकर कानूनी प्रावधान करना होगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एक बार फैसला हो जाने के बाद कानूनी बाधाओं को दूर करने का काम शुरू हो जाएगा।

2013 में भी हुई कोशिश संप्रग सरकार के दौरान 2013 में संयुक्त सचिव का एक नोट लीक हो गया था, जिसमें लोकसभा में पीओके के लिए पांच सीटें आरक्षित करने के लिए संविधान संशोधन का जिक्र था। लेकिन इसे तत्काल दबा दिया गया।

नोट में कहा गया था कि विधानसभा में 24 सीटों के हिसाब से कम-से-कम पांच सीटें लोकसभा में पीओके के लिए होनी चाहिए। भले ही इन्हें विधानसभा की तरह खाली रखा जाए। लोकसभा में पीओके के लिए फिलहाल एक भी सीट नहीं है।

2014 में निजी विधेयक आया राजग सरकार बनने के बाद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने नवंबर 2014 में इसी आशय का निजी विधेयक पेश करने की कोशिश की थी। लेकिन संसदीय समिति ने इसकी इजाजत नहीं दी।

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