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गुजरात में 2002 में हुए दंगों के एक अहम मुकदमे का फैसला आज आने वाला है। अहमदाबाद के गुलबर्ग हाउसिंग सोसाइटी में 28 फरवरी 2002 को एक बड़ी और उत्तेजित भीड़ ने घुस कर 69 लोगों की हत्या कर दी थी जिन में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी भी शामिल थे।

ये दंगे इससे एक दिन पहले साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में हुए हमले के बाद हुए थे जिन में 59 कारसेवक मारे गए थे। गुलबर्ग हाउसिंग सोसाइटी का मुकदमा सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चला है। गुजरात दंगों से सम्बंधित 9 और मुकदमे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुए हैं।

28 फरवरी के हमले में फिरोज खान गुलजार खान पठान के परिवार के पांच सदस्य मारे गए थे। वो कहते हैं उन्हें इस दिन का बेसब्री से इंतजार था। “मैं चाहता हूं कि दोषियों को फांसी की सजा हो।”

मुकदमा 67 लोगों के खिलाफ चला था लेकिन मुकदमे के दौरान चार लोगों की मौत हो चुकी है।

पीड़ितों के वकील एसएम वोहरा ने बीबीसी को बताया कि आज का फैसला अहम होगा। “मुझे उम्मीद है कि कम से कम 35 लोगों को सजा मिलेगी। मैं चाहता हूं कि उन्हें उम्र कैद की सजा मिले।”

मुकदमे में जिरह के दौरान अदालत को बताया गया कि उस दिन हजारों की संख्या में उत्तेजित भीड़ अंदर घुस आई और चार घंटे तक मार-काट का सिलसिला चलता रहा। बच्चे, बूढ़े और औरतें पूर्व सांसद एहसान जाफरी के दो मंजिला घर में पनाह लिए हुए थे।

आखिर में एहसान जाफरी खुद बाहर आये और उत्तेजित भीड़ से कहा कि वो उनकी जान ले लें लेकिन बच्चों और औरतों को बख्श दें। उन्हें घसीट कर बाहर लाया गया, उन पर हमला हुआ। उसके बाद भीड़ ने उनके घर को आग लगा दी।

फिरोजखान गुलजार खान पठान भी हमले में घायल हुए थे। वो सामने वाले घर की छत से सारा नजारा देख रहे थे। “मेरी अम्मी एहसान जाफरी के घर जा रही थीं। बीच में ही मेरी आंखों के सामने उन्होंने मां को मार डाला। मेरे अब्बू और दो भाई और एक बहन को भी मार डाला।इस हमले में सईद खान के परिवार के 10 सदस्य मारे गए थे। उन्होंने कहा, “हमें इंसाफ चाहिए। अगर अदालत में इंसाफ नहीं मिला तो अल्लाह इंसाफ करेगा। लेकिन मुझे लगता है इंसाफ होगा।”

उस दिन सईद खान भी एहसान जाफरी के घर में पनाह लेने वालों में थे। वो मौत के काफी नजदीक थे लेकिन “अल्लाह ने मुझे बचा लिया”।
वो किचन के पीछे, दरवाजे के ठीक बाहर दीवार की आड़ में छुपे रहे। अपनी पत्नी, मां और परिवार के अनन्य सदस्यों की हत्या देखते रहे। “मैं देखता रहा। अपनी आंखों के सामने मेरा परिवार खत्म हो गया।”

सईद खान से कुछ लोगों ने कहा कि अब पीछे जो हुआ भूल जाओ। अब आगे बढ़ो। लेकिन उनका जवाब था कि कैसे भूल जाएं? “इंसाफ होगा तो भूल जाएंगे”
उनके वकील एसएम वोहरा भी भूल जाओ की सलाह देने वालों से नाराज हैं। “किसी के परिवार के 10 लोग मारे गए, किसी के 14। आप उन्हें भूल जाओ की सलाह कैसे दे सकते हैं?”

अब से कुछ घंटे बाद अहमदाबाद की विशेष अदालत अपना फैसला सुनाएगी। मामले की सुनवाई के दौरान चार जजों के तबादले हो चुके हैं और 338 लोगों की गवाही हुई है।

गुलबर्ग हत्याकांड केस के फैसले की घड़ी

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