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गुजरात के गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार मामले में एसआईटी अदालत ने 11 दोषियों को मौत तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा 12 अन्य लोगों को सात साल के कारावास की सजा सुनाई गई है।

 

गुलबर्ग मामले में करीब 15 साल बाद आए इस फैसले का कई लोगों ने स्वागत किया है लेकिन अन्य आरोपियों के कम सजा मिलने पर अपनी निराशा भी जताई है। समाजसेवी तीस्ता सीतलवाड़ ने कहा कि वह अदालत के इस फैसले से नाखुश हैं और जिन लोगों को कम सजा सुनाई गई है उसके खिलाफ वह अगली अदालत में अपील करेंगी। वहीं इस हमले में मारे गए एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी का कहना है कि सभी आरोपियों के आजीवन कारावास मिलनी चाहिए।

वहीं दोषियों के परिवार ने अदालत के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। वह एसआईटी कोर्ट के इस फैसले से नाखुश हैं। उनका कहना है कि उनके परिवार के सदस्य को गलत तरीके से इस मामले फंसाया गया है।

गौरतलब है कि 2002 के गुजरात दंगों के दौरान अहमदाबाद स्थित गुलबर्ग सोसायटी पर करीब 400 लोगों की हिंसक भीड़ ने हमला बोला था। इसमें पूर्व सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोगों की हत्या कर दी गई थी। मामले में बीते दो जून को विशेष अदालत के न्यायाधीश पीबी देसाई ने 66 आरोपियों में से 24 को दोषी करार दिया था।

अदालत ने 11 को हत्या का दोषी माना जबकि विश्व हिंदू परिषद के नेता अतुल वैद्य सहित 13 अन्य लोगों को हत्या से छोटे अपराध के लिए दोषी माना था। 14 साल बाद आए अदालत के फैसले में छह की मौत ट्रायल के दौरान ही हो गई थी।

भाजपा पार्षद बिपिन पटेल सहित 36 लोगों को इस मामले में बरी कर दिया गया था। बरी किए गए अन्य आरोपियों में गुलबर्ग सोसाइटी क्षेत्र के तत्कालीन पुलिस इंस्पेक्टर केजी इरडा और पूर्व कांग्रेस पार्षद मेघसिंह चौधरी भी थे।

गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार: 11 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा

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