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साल 2002 के गुलबर्ग हाउसिंग सोसाइटी नरसंहार मामले में दोषी ठहराए गए 24 मुजरिमों को विशेष अदालत आज यानी गुरुवार को सजा सुना सकती है। 6 जून को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने 24 दोषियों की सजा के बारे में सुनवाई आज तक के लिए टाल दी थी। अदालत आज सुनवाई पूरी होने के बाद दोषियों की सजा का ऐलान कर सकती है।

गोधराकांड के बाद हुए दंगों में मेघाणीनगर में हुए जघन्य हत्याकांड गुलबर्ग सोसायटी मामले में 14 साल बाद अदालत ने 2 जून को अपना फैसला दिया। इस मामले में 66 को आरोपी बनाया गया था जिनमें से 6 की मौत सुनवाई के दौरान ही हो चुकी थी। इसमें 36 आरोपियों को निर्दोष माना गया है, 24 आरोपियों को दोषी माना गया है। इन 24 में से 11 आरोपियों को हत्या के मामले में सजा सुनाई जाएगी। बाकी को दस वर्ष से कम की सजा हो सकती है। सजा के ऐलान को देखते हुए दोषियों के परिवार वाले सुबह से ही अदालत परिसर में पहुंच गए हैं।

अभियोजन पक्ष मामले में हत्या के आरोप में दोषी करार दिए गए 11 लोगों के लिए मृत्युदंड की मांग कर सकता है, जबकि बचाव पक्ष उम्रकैद की सजा सुनाने की मांग कर सकता है। मामले में अन्य 13 को छोटे आरोपों के लिए दोषी करार दिया गया है। इनमें विहिप के नेता अतुल वैद्य भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि 27 फरवरी 2002 को गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के कोच संख्या एस-6 में भीड़ ने आग लगा दी थी। इस घटना में 58 कारसेवक मारे गए। इसके एक दिन बाद 28 फरवरी को गुलबर्ग सोसायटी पर हमला हुआ था। हमले में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोग मारे गए थे।

गुलबर्ग केस में दोषी 24 मुजरिमों के भाग्य का फैसला आज

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