गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड मामले में विशेष एसआइटी अदालत सजा सुनाने की तारीख का एलान सोमवार को करेगी। इस हत्याकांड में पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी समेत 69 लोग मारे गए थे।

2002 के गुजरात दंगों के नौ मामलों की जांच सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नियुक्त एसआइटी ने की थी और यह मामला उनमें से एक है। दो जून को 24 आरोपियों को अदालत ने दोषी पाया था और 36 अन्य को बरी कर दिया था।

अभियोजन की अंतिम दलीलों के साथ ही शुक्रवार को सजा की मात्रा पर बहस खत्म हो गई। इसके बाद विशेष एसआइटी अदालत के न्यायाधीश पीबी देसाई ने सुनवाई 13 जून तक स्थगित कर दी। बहस के दौरान विशेष लोक अभियोजक और एसआइटी के वकील आरसी कोडेकर ने दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग करते हुए अदालत से कहा कि यह मामला “दुर्लभ से दुर्लभतम” की श्रेणी में आता है।

अपनी मांग के समर्थन में उन्होंने अदालत को बताया कि गुलबर्ग निवासियों की हत्या में शामिल लोग आतंकवादी नहीं थे। वे या तो उनके परिचित थे या फिर पड़ोसी। कहा जा सकता है कि “भाई ने भाई को मारा।” अदालत हालांकि अपने पूर्व के फैसले में साजिश के पहलू को नकार चुकी है, लेकिन कोडेकर ने कहा कि दोषियों ने गुलबर्ग के अल्पसंख्यक समुदाय के निवासियों को मारने का फैसला पहले ही कर लिया था।

उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि अगर दोषियों को मृत्यु दंड नहीं दिया सके तो उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी जाए। इससे पूर्व सोमवार को अभियोजन ने सभी 24 दोषियों के लिए मृत्यु दंड की मांग की थी। पीड़ितों के वकील एसएम वोरा ने भी दोषियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की।

लेकिन जज ने उन्हें आगे दलीलें देने से रोक दिया। असंतुष्ट वोरा ने अदालत के बाहर मीडिया को बताया कि एसआइटी और उसके वकील अदालत में साजिश के पहलू को ठीक से रेखांकित नहीं कर पाए।बता दें कि गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस की बोगी जलाए जाने की घटना के बाद 28 फरवरी, 2002 को अहमदाबाद स्थित गुलबर्ग सोसाइटी में यह हत्याकांड हुआ था।

 

गुलबर्ग कांड में सजा की तारीख का एलान सोमवार को

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