यदि गुजरात में आज चुनाव होते हैं तो सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी मात्र 60 से 65 सीटों पर सिमट सकती है। यह बात किसी और के नहीं बल्कि आरएसएस-भाजपा द्वारा किए गए एक सर्वे में सामने निकलकर आई है।

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, यह सर्वे गुजरात में हुए दलित आंदोलन के बाद किया गया। ऊना में मरी हुई गाय के खाल उतारने पर दलित युवकों की पिटाई के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के दो हफ्तों बाद किए गए इस सर्वे को आरएसएस के उन प्रचारकों ने पूरा किया है जिन्हें इस काम के लिए बकायदा प्रशिक्षण दिया गया। सर्वे में यह बात सामने निकलकर आई है की हिंदू वोटों का धुव्रीकरण भाजपा की तरफ हो रहा है जबकि दलित पार्टी से दूर होते जा रहे हैं।

सर्वेक्षण में यह बात निकलकर आई है कि 2017 में होने वाले चुनाव में दलित और पाटीदार आंदोलन के कारण भाजपा को 18 सीटों का नुकसान हो सकता है। सर्वे के अनुसार, आदिवासी भी सरकारी नौकरियों में आरक्षण या जमीन आवंटन को लेकर आंदोलन छेड़ सकते हैं। इससे पहले आरएसएस ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भाजपा को दिसंबर 2015 के पंचायती चुनाव में कम से कम 104 सीटों का नुकसान हुआ है। इसका प्रमुख कारण पाटीदार आंदोलन था। शहरी क्षेत्रों की तुलना में भाजपा को ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा नुकसान हुआ था।

गुजरात चुनाव पर RSS का सर्वे BJP को झटका

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