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घाटी में सेना पर लगातार लगते रहने वाले आरोपों में से एक और आरोप तब गलत साबित हो गया जब 14 साल पहले एकाएक लापता हुआ बटमालू का आदिल रशीद पुणे में सहीसलामत पाया गया। जम्मूकश्मीर पुलिस को पुणे से आए एक डॉक्टर के फोन से पता चला कि आदिल पुणे के एक मनोरोग अस्पताल में है। यहां पिछले छह साल से उसका इलाज चल रहा है।

उसकी याददाश्त कमजोर हो गई थी जो अब वापस रही है। सनद रहे कि वर्ष 2002 में जब दसवीं का छात्र आदिल रशीद लापता हुआ था तो सेना पर उसे अगवा कर गायब करने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में सेना के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन भी हुए थे।

आदिल के पिता अब्दुल रशीद के अनुसार आदिल बटमालू स्थित अपने पैतृक घर से ईदउलज़ुहा के चौथे दिन रहस्यमय तरीके से लापता हो गया। तमाम कोशिशों के बावजूद उसका सुराग नहीं लगा। लड़के के गायब होने से उसकी मां कई सालों से सदमें में थी।

इसी बीच सुरक्षा बलों ने रेडियो कश्मीर पर हुए ग्रेनेड हमले के सिलसिले में गिरफ्तार कुछ आतंकियों की पहचान के लिए अब्दुल रशीद को बुलाया गया। ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया कि इनमें कहीं उसका बेटा भी तो नहीं है।

रशीद के अनुसार उनमें उसका बेटा नहीं था। उसने सुरक्षा बल के अधिकारियों से कहा कि अगर उसका बेटा आतंकी बन गया होगा तो वह उसे खुद गोली मार देगा। ऐसे ही एक दिन रशीद को इलाके के कुछ दुकानदारों ने बताय कि उसके बेटे को लाल चौक में क्रैकडाउन के दौरान सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार किया है। रशीद को लगा कि उसके बेटे को सुरक्षा बलों द्वारा गायब कर दिया गया।

यही कारण था कि वह हर महीने की 10 तरीखको बाकी अभिभावकों के साथ लाल चौक में धरना प्रदर्शन पर बैठते थे। यह धरना एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स ऑफ़ डिसअपीयर्ड पीपल (एपीडीपी) द्वारा आयोजित किया जाता है। रशीद के अनुसार उसने भी यह सोच लिया था कि आदिल भी अब लापता है। वे सिर्फ यह जानना चाहते थे अगर जि़ंदा है तो कहां है और अगर मर गया है तो उसे कहां दफनाया गया, लेकिन 14 साल बाद उसके जि़ंदा मिलने की खबर से परिवार में जबरदस्त ख़ुशी है।

श्रीनगर के एसपी (साउथ) संदीप चौधरी के अनुसार आदिल की उम्र आज 28 वर्ष है। परिवार वालों ने 2003 में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी, लेकिन कुछ पता नहीं चल पा रहा था। उन्होंने बताया कि कुछ ही दिन पहले हमें पता चला कि पुणे के एक मनोरोग अस्पताल में एक आदिल रशीद नाम के मरीज़ का इलाज जारी है। हमने अस्पताल से संपर्क किया और आदिल से बात की।

इसके बाद उसके परिवार वालों से संपर्क किया गया। वह यह खबर सुनकर काफी खुश हुए। चौधरी के अनुसार परिवार द्वारा उसकी शिनाख्त पूरी हो चुकी है और अब जल्द ही हमारी टीम रवाना उसे वापस लाने के लिए पुणे जाएगी।

पुणे में किसी व्यक्ति ने उसे 2010 में एक मनोरोग अस्पताल में भर्ती कराया था। जहाँ उसका इलाज चल रहा है। और हाल में थोड़ी याददाश्त लौटने पर उसने अपना नाम और पता बताया। अब सवाल यह उठता है कि आदिल पुणे कैसे पहुंचा, लेकिन एक बात तो साफ़ हो गई कि सुरक्षा बलों पर लगा अगवाह करने आरोप गलत साबित हुआ।

गलत साबित हुआ सेना पर लगाया एक और आरोप

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