‘कुछ भी हो जाए, अमीता अमेठी से चुनाव लड़ेंगी’। यही कहना है उम्मीदवार के पति संजय सिंह का। वह 9 फरवरी को अपना नामांकन दाखिल करेंगी। संजय सिंह जो खुद एक राज्यसभा सांसद हैं, फिलहाल यूपी में कांग्रेस की प्रचार कमिटी के अध्यक्ष हैं। कांग्रेस संग गठबंधन करने वाली समाजवादी पार्टी अमेठी से भी चुनाव लड़ना चाहती है, लेकिन सिंह सीट सरेंडर करने को तैयार नहीं हैं। समाजवादी पार्टी ने गायत्री प्रजापति को इस सीट पर रीनॉमिनेट किया है, जिन्होंने साल 2012 में अमीता को 9000 वोटों से हराया था।

अमेठी उन चार सीटों में से एक है, जहां कांग्रेस और सपा उम्मीदवार आमने-सामने हैं। गौरीगंज भी अमेठी लोकसभा सीट का हिस्सा है, यहां सोमवार को ही कांग्रेस ने मोहम्मद नईम का नामांकन तय किया है। यह स्थिति तब है जब सपा उम्मीदवार राकेश प्रताप सिंह पहले ही अपना नामांकन दायर कर चुके हैं। पिछली बार सिंह ने नईम को 500 वोटों से हराया था। कांग्रेस के एमएलसी दीपक सिंह ने कहा कि मोहम्मद नईम गौरीगंज से अपना नामांकन दाखिल करेंगे।

अमेठी और रायबरेली की 10 में से 5 सीटों पर सपा ने अपने उम्मीदवारों का एलान किया है, जबकि कांग्रेस ने 7 सीटों पर। दोनों ही पार्टियों के सरेनी और सालोन में उम्मीदवार है। वहीं अमेठी और गौरीगंज के उम्मीदवार भी इस सूची में शामिल हो गए हैं। इस तरह के टकराव सोनिया गांधी और राहुल गांधी के लोकसभा क्षेत्रों के लिए अलग नहीं हैं। यहां चौथे और पांचवे चरण में 23 और 27 फरवरी को वोट डाले जाएंगे। पहले तीन चरणों में जिन 169 सीटों पर वोट डाले जाएंगे, वहां करीब 10 कांग्रेस और सपा उम्मीदवार आमने-सामने हैं।

दोनों पार्टियों ने 169 सीटों की 15 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को टिकट दिया है। दोनों ही पार्टियों ने कई सीटों पर अपने उम्मीदवारों से नामांकन वापस लेने का अनुरोध किया, लेकिन यह सिर्फ खैर, हरगांव और सयाना की सीटों पर ही मुमकिन हो पाया। गंगोह, जहां हाल ही में राहुल गांधी ने अपनी रैली की थी, में सपा अपने उम्मीदवार इंदर सेन को नाम वापस लेने के लिए नहीं मना पाई और उसे 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया। यहां से कांग्रेस प्रत्याशी नौमान मसूद हैं, जो इमरान मसूद के भाई हैं। इमरान ने साल 2014 के लोकसभा चुनावों में पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ हेट स्पीच दी थी। सहारनपुर में सपा के जिला अध्यक्ष जगपाल दास गुज्जर का कहना है, हम इंदर सेन के खिलाफ यह कदम उठाना नहीं चाहते थे, लेकिन हमें लेना पड़ा।

गठबंधन के बावजूद आमने-सामने हैं कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार

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