देहरादून। उत्तराखंड के चुनावी इतिहास में गंगोत्री सीट का खास महत्व है। अभी तक इस सीट से जिस भी पार्टी का उम्मीदवार जीता, प्रदेश में उसी दल की सरकार बनी। इस संयोग को देखते हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा ने इस सीट पर अपना पूरा जोर लगा दिया है। देखना है कि क्या इस बार भी यह सियासी मिथक बरकरार रहेगा या नहीं।

कांग्रेस इस बार भी अपने सिटिंग उम्मीदवार पर दाव खेल रही है। वहीं, बीजेपी ने अपने सबसे मजबूत उम्मीदवार गोपाल रावत को मैदान में उतारा है। गोपाल रावत इससे पहले भी चुनाव जीत कर भाजपा को प्रदेश में सत्ता सुख दिला चुके हैं। गंगोत्री सीट पर होने वाले दंगल के नतीजों को लेकर अब प्रदेश के आम लोग भी उत्साहित हैं।

वर्ष 2000 में उत्तरप्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में आया था। विधानसभा सीटों के परिसीमन से उत्तरकाशी विधानसभा जौनसार, टिहरी, पुरोला, यमुनोत्री और गंगोत्री चार विधानसभा सीटों में बंट गया। वर्ष 2002 में राज्य में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस के विजयपाल सजवाण कांग्रेस से जीत कर विधानसभा में पहुंचे और कांग्रेस की सरकार बनी।

इसके बाद 2007 में भाजपा के गोपाल सिंह रावत जीते तो सरकार बनी भाजपा की। साल 2012 में दोबारा फिर कांग्रेस के विजयपाल के जीतने पर प्रदेश में फिर कांग्रेस की सरकार बनी। अब आगामी विधानसभा चुनाव 2017 में देखना दिलचस्प होगा कि यह सयोग आखिर कब तक यू ही बरकरार रहेगा।

गंगोत्री की सीट तय करेगी प्रदेश में किसकी बनेगी सरकार

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