2017-18 के बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मिडिल क्लास को राहत तो दी, लेकिन उतनी नहीं जितनी उम्मीद लगाई जा रही थी। इनमें अधिकतम 12,500 रुपये तक की छूट दी गई है। वित्त मंत्री ने भले ही 2.5 लाख से 5 लाख तक की सालाना आय पर टैक्स रेट 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया हो, मगर उन्होंने 5 लाख से कम इनकम वालों को मिलने वाली 5 हजार की विशेष छूट को खत्म कर दिया है। हालांकि 3.5 लाख रुपये से कम आय वालों को 2500 रुपये की खास छूट दी गई है। इससे जिन लोगों की सालाना आय 5 लाख रुपये से कम होगी, उन्हें टैक्स में अधिकतम 7500 रुपये का फायदा होगा। सर्च प्रोविजन में बहुत ज्यादा बदलाव करते हुए सरकार अब 10 साल तक के असेसमेंट के हिसाब खंगाल सकेगी। अब तक यह सीमा 6 साल की थी। अब डिपार्टमेंट को यह बताना भी जरूरी नहीं है कि सर्च क्यों की गई।

इनकम टैक्स रिटर्न को रिवाइज करने की प्रक्रिया बदली गई है। इसकी समयसीमा 12 महीने हो गई है, जो असेसमेंट ईयर पूरा होने के बाद एक साल थी। इसका मतलब है कि अगर आप 2017-18 का रिटर्न भर रहे हैं तो रिटर्न की आखिरी डेट जुलाई या अक्टूबर 2018 होती थी। आप उसे 31 मार्च 2019 के बाद एक साल और 31 मार्च 2020 तक रिवाइज कर सकते थे।
नए प्रावधानों के हिसाब से अब इस रिटर्न को सिर्फ 31 मार्च 2019 तक ही रिवाइज किया जा सकेगा। ये प्रावधान असेसमेंट ईयर 2018-19 से लागू होंगे। देरी से रिटर्न फाइलिंग पर सिर्फ इंट्रेस्ट और जुर्माने का प्रावधान था, लेकिन अब लेट फाइलिंग के साथ निर्धारित फीस भी जमा करानी होगी।

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कड़े हुए इनकम टैक्स से जुड़े ये नियम

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