Can clerics be tried under election law, asks SC

‘हिंदुत्व’ को लेकर दो दशक पहले दिए अपने फैसले की जांच-परख के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कई अहम सवाल उठाए हैं। इसी विषय से जुड़े भाजपा विधायक की सदस्यता रद्द किए जाने के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पूछा कि क्या चुनाव के दौरान किसी खास पार्टी या उम्मीदवार के पक्ष में मतदान की अपील करने पर चुनाव नहीं लड़ने वाले किसी धर्मगुरु के खिलाफ जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत भ्रष्ट आचरण का मुकदमा चलाया जा सकता है।

दरअसल, जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 (3) के तहत बांबे हाईकोर्ट ने 1990 में भाजपा के टिकट पर विधायक बने अभिराम सिंह का निर्वाचन ‘हिंदुत्व’ और ‘हिंदू राष्ट्र’ ने नाम पर वोट मांगने के कारण रद्द कर दिया था। अभिराम सिंह की ओर से चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ के समक्ष उपस्थित वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने कहा कि भ्रष्ट आचरण तभी माना जाएगा जब या तो उम्मीदवार या उसका एजेंट धर्म के नाम पर वोट मांगे। उन्होंने कहा कि अगर कोई दूसरा व्यक्ति धर्म के नाम पर वोट मांगता है तो जन प्रतिनिधित्व कानून के मुताबिक उससे उम्मीदवार की सहमति होनी चाहिए। अभिराम सिंह के मामले में दिवंगत बाल ठाकरे और प्रमोद महाजन पर ‘हिंदुत्व’ और ‘हिंदू राष्ट्र’ ने नाम पर वोट मांगने का आरोप है।

इस पर सात सदस्यीय पीठ ने पूछा कि चुनाव न लड़ने और न ही चुनाव जीतने वाले किसी व्यक्ति के खिलाफ कैसे जन प्रतिनिधित्व कानून के खिलाफ भ्रष्ट आचरण का मुकदमा चलाया जा सकता है। अदालत जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 123(3) के दायरे की समीक्षा कर रही है। इस धारा में चुनाव के दौरान भ्रष्ट आचरण करने पर उससे निपटने का प्रावधान है।

पूरे दिन चली सुनवाई के दौरान पीठ ने वकील से पूछा कि वर्तमान में अगर कोई धार्मिक नेता या धर्म गुरु चुनावी प्रक्रिया शुरू होने से काफी पहले धर्म के आधार पर वोट मांगता है तो क्या वह जन प्रतिनिधित्व कानून के दायरे में आएगा। इस पर दातार ने कानूनी जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि अगर चुनाव जीतने वाले उम्मीदवार को भ्रष्ट आचरण का दोषी करार दिया जाता हो तो उसकी उक्त बयान से सहमति जरूरी है। उन्होंने कहा कि उनके मुकदमे में मुख्य भाषण दिवंगत बाल ठाकरे और प्रमोद महाजन ने दिया था। जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत उनके मुवक्किल को दोषी ठहराने से पहले इन दोनों से पूछताछ जरूरी थी।

क्या धर्म के नाम पर वोट मांगने वालों पर चल सकता है केस: सुप्रीम कोर्ट

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