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लखनऊ । विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह ने राहुल गांधी के ‘खून की दलाली’ वाले बयान को घटिया मानसिकता वाला बताया है। उन्होंने राहुल से सवाल किया, ‘क्या इंदिरा गांधी ने भी भारत-पाक जंग के वक्त 1971 में खून की दलाली की थी? अगर राहुल ये सोचते हैं कि इस तरह के घटिया बयान देकर वे राजनीति में ऊपर जाएंगे तो ऐसा नहीं है। वे और नीचे ही जाएंगे।’ ‘राष्ट्रवाद की बात करने वालों को बीजेपी वाला बता दिया जाता है। केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह गुरुवार को गोमती नगर स्थित होटल ताज में प्रोग्रेस हारमोनी डेवलेपमेंट (पीएचडी) चैंबर की ओर से राष्ट्र और राष्ट्रीयता विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया।

वीके सिंह ने कहा कि1857 में अंग्रेजों को जब इस बात का एहसास हो गया कि यदि भारतीय एकजुट हो गए तो उन्हें देश छोड़ना पड़ जाएगा। तब अंग्रेजों ने लोगों को जाति-धर्म के नाम पर बांटने का काम किया। वह सफल हुए और कई वर्षो तक शासन किया। ऐसा ही आजादी मिलने के बाद किया गया। शासन करने के लिए 70 वर्षो तक लोगों को सिर्फ धर्म और जाति के आधार पर बांटने का काम किया गया। इसी के चलते हमें इस पर विचार करना पड़ रहा कि राष्ट्र और राष्ट्रीयता के मायने क्या हैं।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने पहुंचे केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने कहा कि आज एक ऐसी विडंबना है कि जब हम घर से निकलते हैं तो लोगों से जाति के बारे में पूछते और बताते हैं, प्रदेश के बाहर होने पर शहर और गांव के बारे में पूछते हैं। लेकिन देश के बाहर होने पर खुद को भारतीय बताते हैं। 1हम देश के भीतर रहकर खुद के भारतीय होने का परिचय क्यों नहीं देते। हम क्यों जाति, धर्म और भाषा के आधार पर एक दूसरे को देखेंगे। उन्होंने कहा आजादी के बाद जब देश को और मजबूती के साथ जोड़ने का काम होना था। वह नहीं हुआ।

 

क्या इंदिरा ने 1971 में की थी ‘खून की दलाली’: वीके सिंह

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