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केंद्र और महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने एक बार फिर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। उत्तराखंड हाई कोर्ट द्वारा कल सुनाए गए फैसले के बाद शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिए केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए लिखा है, ‘खुद को न्यायप्रिय और कानून पंडित कहलाने वाली केंद्र सरकार द्वारा लादे गए शासन को कचरे की टोकरी में फेंक दिया है। संविधान 345 का आधार लेते हुए केंद्र द्वारा की गई कार्रवाई पूर्वाग्रह से दूषित थी।’

सामना के जरिए शिवसेना ने लिखा है कि केंद्र में मजबूत सत्ता इसलिए विरोधी दल की सरकार जिन राज्यों में हैं वहां मनमानी नही की जा सकती और नहीं टिक सकती है और यहीं सबक उत्तराखंड मामले ने एक बार फिर दिया है। सामना ने लिखा है, “बहुमत का निर्णय लेने की जगह विधानसभा है, लेकिन यह निर्णय हरीश रावत को नहीं दिया गया। निचली अदालत कहती है कि विधानसभा में बहुमत सिद्ध करो, जबकि उससे उपर की अदालत कहती है कि इसकी जरूरत नहीं।”

सामना के अनुसार, ‘उत्तराखंड मामले में राष्ट्रपति से गलती हुई, ऐसा न्यायालय का अब कहने का अर्थ है कि मोदी सरकार से गलती हुई है। राष्ट्रपति हमारे देश के संवैधानिक प्रमुख हैं, पर वह आखिरकार रबर की मुहर ठहराए जाते हैं।’

 

केंद्र के थोपे शासन को कोर्ट ने कचरे की टोकरी में फेंका

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