migrants_1466378642

कैराना! …ये नाम आज सबकी जुबान पर है। सियासी लोग अपने – अपने समीकरणों के हिसाब से इस नाम पर ताल ठोंक रहे हैं। भाजपा तो इसे 2017 के समर में बड़े हथियार के तौर देख ही रही है। बात पलायन से शुरू हुई है, लिहाजा कैराना से बाहर भी नजरें दौड़ना लाजिमी है।

बेशक कैराना से हिंदुओं के पलायन को लेकर भाजपा सियासी मैदान में ताल ठोंक रही हो, लेकिन हालात उन गांवों की भी अच्छे नहीं है, जिन्हें भाजपा के मंत्रियों- सांसदों ने गोद ले रखा है। संभल लोकसभा में आने वाला बुकनाला ऐसा ही एक गांव है, जहां डेढ़ दशक पहले तक हिंदू कुल आबादी में पचास फीसदी थे।

लेकिन अब तीन हजार से अधिक आबादी वाले इस गांव में बच्चे – बुजुर्ग सब मिलाकर गिनती के महज 20 हिंदू ही बचे हैं। खास बात यह है कि इस गांव को केंद्रीय अल्पसंख्यक एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने गोद ले रखा है और गांव में उनका आना जाना लगा रहता है।

.. तो क्या भाजपा अब इसे भी दूसरा कैराना कहेगी..? सियासी लोग कह तो ये भी सकते हैं कि भाजपा के मिनिस्टर के गांव में भी हिंदू महफूज नहीं रहे्…।

गिनती के 20 हिंदू बचे हैं मुख्तार अब्बास नकवी द्वारा गोद लिए गांव बुकनाला में

कैराना पर शोर मचाने वाले, बुकनाला पर शायद उतनी हायतौबा न मचाएं। लेकिन यदि हालात देखें तो दोनों में बहुत ज्यादा फर्क नहीं है। बात अगर पलायन की है तो यहां कैराना से ज्यादा हिंदुओं ने पलायन किया है। वजह भी अपराध है।

कैराना में तो थम भी गया है, लेकिन बुकनाला में पलायन अब तक जारी है। कभी 1500 से ज्यादा हिंदू थे लेकिन अब गिनती के 20 ही बचे हैं। ये बचे हुए भी कब तक रहेंगे कह नहीं सकते, क्योंकि पलायन का सिलसिला अब तक जारी है।

एक परिवार तो रविवार को ही चूल्हा चक्की समेटकर गांव छोड़ गया। पैर बाकी बचे चार परिवारों के भी उखड़ चुके हैं। ये भी मुमकिन है कि साल के आखिर तक गांव में एक भी हिंदू न बचे।

दिल्ली हाईवे पर लोधीपुर- असमोली लिंक रोड पर सड़क किनारे पड़ने वाला बुकनाला गांव कभी हिंदू बहुल होता था। यह गांव संभल लोकसभा और असमोली विधानसभा क्षेत्र में आता है। 2011 की जनगणना के हिसाब से गांव की आबादी 3084 है, जिसमें महज 20 ही हिंदू हैं। इन्हीं बीस में बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं।

जबकि 15 साल पीछे जाकर देखें तो गांव में 1500 से ज्यादा हिंदू थे। लेकिन बदलते माहौल में दोनों वर्गों के बीच दिलों का फासला बढ़ा तो हिंदुओं ने पलायन शुरू कर दिया। पाल बिरादरी के 11 परिवारों ने 15 साल पहले एक साथ गांव छोड़ दिया था।

इसके बाद से हिंदुओं के गांव से पलायन का जो सिलसिला शुरू हुआ वो अभी तक थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब गांव में सिर्फ राजवीर सिंह, प्रताप सिंह, करन सिंह और सोमपाल के परिवार रह गए हैं। गांव के लोगों का कहना है कि कभी इस गांव में ज्यादातर हिंदू ही थे, इक्का दुक्का मुस्लिम परिवार थे। लेकिन जैसे – जैसे मुस्लिमों की आबादी बढ़ी तो हिंदुओं ने खुद ही गांव छोड़ना शुरू कर दिया।

रविवार को जब अमर उजाला टीम बुकनाला पहुंची तो गांव एक और हिंदू परिवार पलायन के लिए घर का सामान बटोर रहा था। ये परिवार नन्हें सिंह का था। रविवार को गांव से सामान बटोरकर पलायन की कवायद में जुटे नन्हें सिंह का कहना है कि जीना मुश्किल हो गया था। घर भी सुरक्षित नहीं रह गया था।

कभी बेटी को गोली मार दी तो कभी बेटे को, अपराध कब तक झेलते। नन्हें सिंह ने घर जमीन बेचकर गांव छोड़ दिया है और इन दिनों नया गांव में बनाए नए घर में अपना सामान शिफ्ट करने में व्यस्त हैं। रविवार को उन्होंने घर का काफी सामान समेट भी लिया।

नन्हें ने अपनी दस बीघा जमीन और घर भी बेच दिया है। नन्हें का कहना है कि सात साल पहले बदमाशों ने उनकी बेटी को गोली मार दी थी तो डेढ़ साल पहले बेटे पर कातिलाना हमला कर दिया था। जब जान बचाना मुश्किल हो गया तो बढ़ते अपराधों की वजह से सुरक्षित ठिकाने के लिए गांव छोड़ने की ठान ली।

ग्राम प्रधान के पति सब्बन मियां का कहना है कि गांव में हिंदू – मुस्लिम के बीच भाईचारे का माहौल है। जिन लोगों ने पलायन किया, वो सभी रोजगार की तलाश में गए हैं। उन्होंने कहा कि, ये बात सच है कि गांव में चंद हिंदू बचे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि पलायन सिर्फ हिंदुओं ने किया है, तमाम मुसलमान भी रोजी रोजगार के सिलसिले में गांव छोड़कर जा चुके हैं।

सब्बन मियां का कहना है कि अभी भी कई हिंदू हैं जो कामकाज के लिए गांव से बाहर चले गए हैं और गांव में अपने घर – मकान बनवा रहे हैं। बोले, जिन लोगों ने गांव छोड़ दिया उनसे भी रोज बात होती है।

केंद्रीय मंत्री के गोद लिए गांव से हिंदुओं का पलायन

| उत्तर प्रदेश, मुरादाबाद | 0 Comments
About The Author
-