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चुनावी बिसात पर रालोद मुखिया अजित सिंह ने बुधवार को निर्णायक चाल चल दी है। अब छोटे  चौधरी  ही राज्यसभा चुनाव में  कांग्रेस के कपिल सिब्बल और सपा के विशंभर प्रसाद निषाद की नैया पार लगाएंगे। उन्होंने सपा और कांग्रेस को राज्यसभा चुनाव में समर्थन देने के एलान  कर दिया है। इसके बाद सिब्बल और निषाद का चुना जाना लगभग तय है।

यूपी में  राज्यसभा में चुनाव में विधायकों के नंबर गेम में सपा और कांग्रेस पिछड़ी हुई है। एक प्रत्याशी की जीत के लिए  34 विधायकों का समर्थन चाहिए। सपा को सात प्रत्याशियों के लिए 238 एमएलए की जरूरत होगी। उनके पास 229 एमएलए हैं।

तीन निर्दलीय समेत पांच अन्य  का सपा समर्थन होने का दावा कर रही है। यह आंकड़ा 234 तक पहुंचता है। उसके बाद भी सपा को चार विधायकोंकी दरकार है। काग्रेस के पास 29 एमएलए हैं।  उनका एक प्रत्याशी है। उन्हें पांच एमएलए जीत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए चाहिए। रालोद के पास  आठ विधायक है रालोद ने सपा और  कांग्रेस  को समर्थन का एलान कर दिया। कांग्रेस  केकपिल सिब्बल  और सपा केसातवें नंबर के  प्रत्याशी विशंभर  प्रसाद निषाद केलिए  रालोद के वोट जाने से उनके विजय की नैया पार होना तय है।

हालांकि कांग्रेस  ने बसपा भी कुछ वोटों  की मदद मांग रखी है। इसकी वजह है कि कांग्रेस को अपने एक दो विधायकों  के  क्रास वोटिंग करने का खतरा है। कांग्रेस के लिए कपिल सिब्बल की जीत बेहद जरूरी है। दरअसल, उत्तराखंड में फिर से पार्टी की सरकार बनवाने में सिब्बल ने ही कानूनी लड़ाई लड़ी। पार्टी उनके इस समर्पण का बदला राज्यसभा में भेजकर चुकाना चाहती है।

अजित सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष रालोद ने कहा कि राजनीतिक गंभीरता को देखते हुए यूपी में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस केपक्ष में रालोद के विधायक वोटिंग करेंगे। ऐसा वक्त की जरूरत भी है। रालोद हमेशा सकारात्मक राजनीति करने के पक्ष में रहा है।

कांग्रेस और सपा को अजित सिंह के चलते राज्यसभा में मिलेगी ताकत

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