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संगठन और संघ से विचार-विमर्श और मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं। रविवार देर रात आई रिपोर्ट में भी दावा किया गया कि सरकार ने इसके लिए राष्ट्रपति से समय मांगा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।

वैसे भी पीएम नरेंद्र मोदी सात जुलाई को चार अफ्रीकी देशों की यात्रा पर रवाना होने से पहले मंत्रिमंडल का विस्तार चाहते हैं, लेकिन इससे पहले छह जुलाई को ईद पड़ने की संभावना है। ऐसे में पीएम के पास मंगलवार यानी पांच जुलाई का दिन ही मुफीद माना जा रहा है।

मंगलवार को विस्तार नहीं हुआ तो फिर यह 12 जुलाई यानी प्रधानमंत्री के स्वदेश वापसी के तुरंत बाद भी संभव नहीं होगा, क्योंकि 18 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है।

सामान्य तौर पर सत्र से करीब एक सप्ताह पहले विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े सवालों के जवाब छपने लगते हैं और उनमें संबंधित विभाग के मंत्री का भी नाम छापा जाता है। इसलिए मोदी के स्वदेश वापसी के बाद मंत्रिमंडल विस्तार के लिए मुफीद समय नहीं बचता।

गौरतलब है कि मंत्रिमंडल विस्तार पर व्यापक विमर्श के दौरान चुनावी राज्यों को साधने और अब तक मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व से वंचित राज्यों की सुध लेने पर जोर दिया गया था। इसमें सबसे अधिक महत्व भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश को मिला।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री बीते सप्ताह ही पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ बैठक के बाद सभी मंत्रालयों की समीक्षा भी कर चुके हैं।

मंत्रिमंडल विस्तार पर विचार-विमर्श की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सियासी गलियारे में संभावित तिथि, कुछ मंत्रियों की विदाई, कुछ की तरक्की और मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले संभावित नए चेहरों को लेकर कयासों का बाजार गर्म है।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले कुछ संभावित चेहरों से मुलाकात भी की है, इसलिए जाहिर तौर पर अब चर्चा फेरबदल की तारीखों को लेकर है। जिस प्रकार मध्य प्रदेश में शिवराज मंत्रिमंडल में विस्तार के दौरान 75 वर्ष की उम्र पार कर चुके दो मंत्रियों को विदा किया गया है, उसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी यही फार्मूला अपनाने की भी चर्चा है।

सूत्रों का कहना है कि संभावित विस्तार में चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश को सबसे ज्यादा अहमियत मिलेगी। जबकि अन्य चुनावी राज्य हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड का नई सरकार के गठन से ही मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व के मामले में जारी सूखा खत्म होगा।

उत्तर प्रदेश के पांच चेहरों को मंत्रिमंडल और केंद्रीय संगठन में अहम भूमिका दिए जाने पर सहमति बनी है। इसी क्रम में उत्तराखंड से एक को मंत्रिमंडल तो दूसरे को संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका दी जाएगी।

कल हो सकता है मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार

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