crude oil 08 02 2017

चालू वित्त वर्ष की जनवरी से मार्च की तिमाही में खुदरा महंगाई की दर पांच प्रतिशत रह सकती है। रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति की दोमाही समीक्षा में यह अनुमान जाहिर किया है, लेकिन ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने, मुद्रा विनिमय बाजार में अस्थिरता और सातवें वेतन आयोग के तहत मकान किराये के प्रभाव से अगले वित्त वर्ष 2017-18 में महंगाई बढ़ने का खतरा है।

आरबीआइ का अनुमान है कि आगामी वित्त वर्ष की पहली छमाही में महंगाई दर चार से साढ़े चार फीसद और दूसरी छमाही में साढ़े चार से पांच प्रतिशत रहने का अनुमान है। आरबीआइ अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा करते वक्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर को संज्ञान में लेता है। दिसंबर, 2016 में खुदरा महंगाई दर 3.41 प्रतिशत थी।

नोटबंदी के बाद डाली 9.92 लाख करोड़ रुपये की नकदी

नोटबंदी के बाद से अब तक रिजर्व बैंक ने 9.92 लाख करोड़ रुपये की नकदी डाली है। सरकार ने जब नोटबंदी का फैसला किया था तब 15.45 लाख करोड़ रुपये के 500 रुपये से 1000 रुपये के पुराने नोट होने का अनुमान है। इस तरह पुराने नोटों के मुकाबले अब तक 64 प्रतिशत मुद्रा की आपूर्ति की जा चुकी है।

सिस्टम में नई करेंसी के इसी प्रवाह को देखते हुए आरबीआइ ने सीमा हटाने का फैसला किया है। इससे पहले आरबीआइ ने एक फरवरी को चालू खाते से नकदी निकासी की सीमा हटाने का ऐलान किया था। सरकार ने 8 नवंबर 2016 को 500 रुपये और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद करने के फैसले के बाद बैंक खाते से नकदी निकालने की सीमा तय कर दी थी।

जून के बाद ही पता चलेगा कितने पुराने नोट वापस आए

नोटबंदी के बाद बैंकों में 500 रुपये और 1000 रुपये के कितने नोट जमा हुए इसका सही-सही आंकड़ा 30 जून के बाद पता चलेगा क्योंकि अनिवासी भारतीयों के लिए पुराने नोट जमा करने की सीमा उसी दिन खत्म हो रही है। देश में आरबीआइ की 19 जगहों पर 4,000 करेंसी चेस्ट हैं। 30 दिसंबर के बाद सभी बैंकों को पुराने नोट के बारे में आंकड़े पुनः चैक करने को कहा है। यह काम थोड़े समय में पूरा हो जाएगा।

कच्चे तेल की तेजी से महंगाई बढ़ने का खतरा

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