ola-uber 24 10 2016

न्यायभूमि और उसके सहयोगी-सदस्यों ने ओला और उबर के संचालको के खिलाफ तीस हजारी कोर्ट में एक आपराधिक मुुकदमा दायर कर दिया है। संस्था ने गंभीर आरोप लगाते हुए इन कंपनियों के खिलाफ मोटर व्हीकल अधिनियम की विभिन्न धाराओं के उल्लंघन में 26 करोड़ चालान काटने और FIR दर्ज करने का अनुरोध किया है।

दोनों कंपनियां तीन वर्षों से अधिक समय से दिल्ली में बिना कानून का पालन किए कारोबार कर रही हैं। दिल्ली में रेडियो टैक्सी सेवा उपलब्ध कराने के लिए इन कंपनियों के पास मोटर व्हीकल अधिनियम की धारा 93 के तहत लाइसेंस होना आवश्यक है जिसे इन कंपनियों ने अभी तक दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग से प्राप्त नहीं किया है। कंपनियां CNG की बजाए डीजल टैक्सी से सेवा दे रही हैं जो सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मोटर व्हीकल अधिनियम की धारा 67 के खिलाफ ओला और उबर मनमाने तरीके से किराया वसूल कर रही हैं। कानून के अनुसार केवल राज्य सरकार की टैक्सी किराये का निर्धारण कर सकती है। किसी भी उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाता है और अपराधी को हर उल्लंघन के लिए 10,000 रूपए के जुर्माने के साथ साथ एक साल की कैद भी हो सकती है। शिकायतकर्ताओं ने ये भी आरोप लगाया कि ओला और उबर सर्ज प्राइस जैसे गैर कानूनी हथकंडे भी अपना रही हैं।

ओला और उबर के खिलाफ 91,000 करोड़ का दावा ठोका

| उत्तर प्रदेश | 0 Comments
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