मुंबई। यदि साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जमानत मिलती है तो राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) को कोई एतराज नहीं होगा। एनआइए ने गुरुवार को बांबे हाई कोर्ट में रखे अपने पक्ष में यह बात कही। साध्वी प्रज्ञा 2008 मालेगांव बम धमाका मामले में आरोपी हैं। एनआइए इसकी जांच कर रही है।

एनआइए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि एजेंसी पहले ही कह चुकी है कि मकोका यानी महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट के तहत साध्वी प्रज्ञा पर कोई मामला नहीं बनता है। इससे पहले सत्र न्यायालय ने साध्वी प्रज्ञा की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।

इसके बाद वह हाई कोर्ट की शरण में गईं थीं। प्रज्ञा ने अर्जी में कहा है कि पिछले छह वर्षों से वह जेल में हैं। दो जांच एजेंसियों ने कोर्ट में विरोधाभासी निष्कर्ष परिणाम पेश किए हैं।

ऐसे में उन्हें जेल में रखना न्यायसंगत नहीं है। जस्टिस आरवी मोरे और शालिनी फांसलकर-जोशी की खंडपीठ उनकी अर्जी पर सुनवाई कर रही है।

अनिल सिंह ने खंडपीठ को बताया, ‘पूर्व में जांच करने वाली एजेंसी महाराष्ट्र आतंकरोधी दल (एटीएस) ने इस आधार पर मकोका लगाया था कि आरोपी अन्य बम धमाकों में भी लिप्त रही हैं।

हालांकि एनआइए जांच में पता चला कि आरोपी सिर्फ मालेगांव बम धमाके में ही शामिल थीं। ऐसे में मकोका के तहत साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ मामला नहीं बनता है।’

 

एनआईए को साध्वी प्रज्ञा को जमानत देने पर कोई एतराज नहीं

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