नई दिल्ली (एजेंसी)। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव पूरे होने के बाद जारी एग्जिट पोल के नतीजों से कांग्रेस में खलबली मच गई है। हालांकि पार्टी ने जाहिरा तौर पर एग्जिट पोल के नतीजों को खारिज कर दिया है लेकिन इन पर चर्चा के लिए गुरूवार को दोपहर बाद राहुल गांधी के निवास पर बैठक बुलाई गई है।

विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन का आकलन कर रही कांग्रेस को लोकसभा चुनावों के पहले संप्रग में एकजुटता की चिंता सताने लगी है। मतदाताओं के मूड से आशंकित पार्टी मान रही है कि इन चुनावों में बुरी हार संप्रग के बचे हुए घटक दलों को पुनर्विचार के लिए मजबूर कर सकती है। मतदान के बाद विभिन्न एजेंसियों की रायशुमारी और राज्यों से मिल रहे फीडबैक ने कांग्रेस नेतृत्व को निराश किया है।

पार्टी के एक रणनीतिकार ने कहा कि छत्तीसगढ़ में उन्हें बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है लेकिन यदि परिणाम वैसे ही रहते हैं, जैसे एग्जिट पोल बता रहे हैं, तो चिंता स्वाभाविक है। ऐसे में केन्द्र सरकार के बचे हुए कार्यकाल का और डांवाडोल होना तय है। कांग्रेस यदि सभी जगह हार जाती है, तो शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी या अजित सिंह के राष्ट्रीय लोकदल का क्या रुख होगा, तय करना मुश्किल होगा।

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने एग्जिट पोल के नतीजों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘हर बार यही होता है। आप हमेशा कांग्रेस को हल्के में लेते हैं और लोग हमें वोट दे देते हैं। मैं इस बारे में टिप्पणी करने के लिए 8 दिसंबर तक इंतजार करूंगी।’ 2004 और 2009 के आम चुनावों में ज्यादातर सर्वेक्षणों में कांग्रेस की जीत का अनुमान नहीं लगाया गया था।

जहां कांग्रेस ने इन सर्वेक्षणों को खारिज कर दिया, वहीं भाजपा खुद को जीता हुआ महसूस कर रही है। पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, ‘ये नतीजे हमारी उम्मीदों के मुताबिक हैं। हमने हमेशा से कहा है कि हमारे दोनों मुख्यमंत्री सत्ता में वापस लौटेंगे और राजस्थान और दिल्ली में हमारी घर वापसी होगी। पार्टी और कार्यकर्ताओं ने इसके लिए जबरदस्त कोशिश की है और नरेंद्र मोदी का रोल भी काफी अहम रहा। हमारा मानना है कि बड़ी तादाद में महिलाओं और युवाओं ने हमें वोट दिया है और आम चुनाव में इस ट्रेंड में और बढ़ोतरी होगी।’

एग्जिट पोल के नतीजों से कांग्रेस में खलबली

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