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उठ जा मेरे लाल। देख तेरी मम्मी आ गई है। बस! एक बार तो मम्मी कह दे। रुंधे गले से बस इतना निकला और बेटे की लाश से लिपटकर रोने लगीं शहीद एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी की मां मनोरमा द्विवेदी। पत्नी और बच्चों का तो रो-रोकर बुरा हाल था। रोते जाते और कहते, अब परिवार की देखभाल कौन करेगा।

एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी मूल रूप से औरेया जिले के रहने वाले थे। इनके परिवार में पिता श्रीलचंद, मां मनोरमा देवी और पत्नी अर्चना देवी हैं। बेटे की मौत की खबर पाकर मां मनोरमा देवी शुक्रवार को मथुरा में उनके सरकारी आवास पर पहुंची। जैसे ही यहां मुकुल द्विवेदी का शव पहुंचा कोहराम मच गया।

मां मनोरमा देवी बेटे के शव से लिपटकर बिलखने लगीं। …बेटा उठ जा। देख तुझे तेरी मम्मी बुला रही है। एक बार सबसे बात तो कर लो। देख सारे परिवार वाले आ गए। मां का हर वाक्य वहां उपस्थित लोगों के हृदय में शूल सा लगा। लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि उन्हें सांत्वना दे। मां बिलखती हुई सवाल करती रहीं…पापा को दवा के बारे में कौन पूछेगा। मां से रोज बात कौन करेगा। छोटे-छोटे बच्चे हैं मेरे लाल के कौन रखेगा उनका ख्याल। पत्नी का भी रो-रोकर बुरा हाल था।

एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी को उनके एक ज्योतिष मित्र ने बताया था कि उनकी गृह दशा ठीक नहीं चल रही है। कोई संकट आ सकता है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप कराने की सलाह दी गई थी। बताया जाता है कि जाप शुरू भी हो गया था। मगर इससे पहले कि जाप पूरा होता उन पर संकट आ गया।

‘एक बार तो मुझे मम्मी कह दे मेरे लाल’

| उत्तर प्रदेश | 0 Comments
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