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देशद्रोह के मामले में आरोपी जेएनयू छात्र उमर खालिद व अनिर्बान भट्टाचार्य को हाई कोर्ट ने राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने शुक्रवार को जेएनयू प्रशासन द्वारा किए गए दोनों के निलंबन पर रोक लगाते हुए कहा कि जब तक निलंबन के खिलाफ संबंधित अथॉरिटी उनकी अपील का निपटारा नहीं करती, तब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए।

अदालत ने अपने निर्देश में कहा कि याची जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार व अन्य के समान राहत प्राप्त करने का अधिकार रखते हैं। बता दें कि उमर और अनिर्बान ने कन्हैया व अन्य से पहले फैसले को चुनौती दी थी, जिस पर अदालत ने जेएनयू प्रशासन से जवाब मांगा था और मामले की सुनवाई 30 मई तय की थी। इसी बीच दोनों ने नए सिरे से याचिका दायर कर राहत मांगी थी।

ज्ञात रहे कि अदालत ने 13 मई को दिए फैसले में कन्हैया कुमार, ऐश्वर्या अधिकारी, कोमल मोहित, चिंटू कुमारी सहित आठ छात्रों के निलंबन व जुर्माने पर सशर्त रोक लगाई थी। अदालत ने उन्हें जांच समिति की निलंबन व जुर्माने संबंधी सिफारिश तथा निर्णय के खिलाफ जेएनयू अथॉरिटी के पास अपील करने का निर्देश दिया था।

जेएनयू में ओबीसी छात्रों को प्रवेश परीक्षा में भी आरक्षण

जेएनयू में शुक्रवार को विद्वत परिषद में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। संस्कृत अध्ययन केंद्र में अगले सत्र तीन नए कोर्स शुरू करने पर सहमति बनी, हालांकि इसे अभी रिव्यू के लिए कहा गया है। जेएनयू छात्रसंघ के संयुक्त सचिव सौरभ कुमार शर्मा ने बताया कि प्रवेश परीक्षा तथा साक्षात्कार में ओबीसी वर्ग के लिए 50 फीसद सीटें आरक्षित करने पर भी सहमति बनी है। हॉस्टल में भी ओबीसी वर्ग के लिए 27 फीसद सीटें आरक्षित करने पर चर्चा हुई।

 

उमर व अनिर्बान को मिली हाई कोर्ट से राहत

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