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उत्तराखंड में अनुच्छेद 356 का प्रयोग कर राष्ट्रपति शासन लगाने और केंद्र सरकार द्वारा लेखानुदान अध्यादेश लाए जाने को चुनौती देती निवर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत की याचिका पर हाईकोर्ट में सनुवाई पूरी हो चुकी है। मामले पर थोड़ी देर में अहम फैसला आ सकता है।

मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आप साफ निर्देश क्‍यों नहीं देते कि आप एक हफ्ते के लिए राष्‍ट्रपति शासन नहीं हटाएंगे। कल आप राष्‍ट्रपति शासन हटाएंगे और किसी को बुलाएंगे तो यह न्‍याय का मखौल उड़ाने जैसा होगा, क्‍या सरकार एक प्राईवेट पार्टी है?

कोर्ट ने आगे फटकार लगाते हुए कहा‍ कि हमें गुस्‍से से ज्‍यादा दुख है कि आप इस तरह कैसे अदालत के साथ खेल सकते हैं?

इससे पहले बुधवार को हाईकोर्ट ने केंद्र के अधिवक्ता से कहा कि देश में कोई राजा नहीं है, कोई सर्वशक्तिमान नहीं है। राष्‍ट्रपति अच्छा इंसान हो सकता है, राष्‍ट्रपति के साथ जज भी गलत हो सकते हैं। भारतीय न्यायपालिका में दोनों के फैसलों को चुनौती दी जा सकती है।

खंडपीठ ने यह टिप्पणी असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा राष्ट्रपति शासन लगाने पर दी गई दलील ‘यह कोई इंस्पेक्टर का आदेश नहीं राष्ट्रपति का है, उनका लंबा अनुभव है, काफी सोच समझ कर ही फैसला दिया’ पर की।

कोर्ट ने विनियोग विधेयक को ध्वनि मत से पारित करने के स्पीकर के फैसले तथा निवर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग मामले को लेकर भी तीखे सवाल किए। गुरुवार को केंद्र सरकार ने भाजपा के निलंबित विधायक भीमलाल आर्य के मामले में कुछ दस्तावेज कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए, जिसके बाद फैसला आने की संभावना जताई जा रही है।

 

उत्तराखंड में राष्‍ट्रपति शासन पर HC में सुनवाई पूरी

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