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भले ही सामाजिक समरसता के लिए लाख प्रयास किए जा रहे हों, लेकिन दलितों पर अत्याचार रुकने के नाम नहीं ले रहे हैं।

रुड़की के इमलीखेड़ा में प्राचीन शिव मंदिर में गए दलितों का प्रवेश रोक दिया गया। मामले को लेकर जहां दलितों में आक्रोश है, वहीं इससे गांव में तनाव का माहौल बन गया है। उत्पीड़न के खिलाफ दलितों ने गांव में प्रदर्शन भी किया।

पिरान कलियर थाना क्षेत्र के गांव इमलीखेड़ा में प्राचीन शिवबालाजी मंदिर है। सालों से मंदिर में सभी बिरादरी के लोग पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं, रोजाना की तरह सोमवार की शाम को भी मंदिर में गांव के कुछ युवक पूजा करने के लिए गए थे। आरोप है कि मंदिर में दो जातियों के लोगों ने उन्हें मंदिर में घुसने से रोक दिया।

साथ ही चेतावनी दी कि यह मंदिर हिंदुओं का है, दलितों का मंदिर में प्रवेश वर्जित है। आरोप है कि उन्हें धमकी देते हुए मंदिर परिसर से भगा दिया गया। पीड़ितों ने यह घटना पहले अपने परिजनों और बाद में बिरादरी के लोगों को दी। दलित बिरादरी के लोगों में मामला आग की तरह फैल गया।

मंगलवार सुबह को युवकों ने फिर से मंदिर में जाने का हौसला दिखाया, लेकिन फिर भी मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया। मंदिर में रोके जाने से दलितों में गहरा रोष है। पीड़ितों का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए और मंदिर में जाने का उन्हें समान अधिकार दिलवाया जाए।

चार-पांच दिन से कुछ लड़के मंदिर में दारू पीने के लिए आते हैं। सोमवार शाम को तो आरती के दौरान ही मंदिर में पहुंच गए। मना करने पर युवकों ने उनके साथ गाली-गलौज की और मंदिर से भगाने तथा जाने से मारने की धमकी दी। मंदिर में प्रवेश से रोकने के आरोप पूरी तरह झूठे हैं। गांव के किसी भी व्यक्ति ने मंदिर में जाने से किसी को नहीं रोका।
– बाबूलाल, पारसर, मंदिर के पुजारी, इमलीखेड़ा

शिव मंदिर में हाथ जोड़ने के लिए गए थे, लेकिन कुछ लोगों ने यह कहते हुए भगा दिया कि यह मंदिर तुम्हारा नहीं है।
– दीपक
शराब पीने के आरोप निराधार हैं, अब बचने के लिए आरोपियों की ओर से उनके ऊपर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।
– अक्षय

मामला मेरी जानकारी में नहीं आया है और न ही मुझे कोई ऐसी शिकायत मिली है। फिर भी मैं मामले की जांच करवाता हूं। हालांकि आजतक ऐसा कोई प्रकरण क्षेत्र में नहीं आया है।
– मंगेश घिल्डियाल, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, रुड़की

उत्तराखंड में दलितों पर अत्याचार की हद पार

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