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उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के मामले पर गुरुवार को हाईकोर्ट नैनीताल में सुनवाई पूरी हो गई। अब हाईकोर्ट में फैसला लिखा जा रहा है।

गुरुवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई और पूछा कि उत्तराखंड से राष्ट्रपति शासन क्यों नहीं हटाया जा रहा है। केंद्र सरकार क्यों राष्ट्रपति शासन हटाकर बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका नहीं दे रही है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि सरकार प्राइवेट पार्टी है क्या? केंद्र सरकार हाईकोर्ट से किसी भी कीमत पर नहीं खेल सकती।

अब कुछ ही देर में आर्टिकल 356 पर फैसला आने की संभावना जताई जा रही है। गुरुवार को सुबह 11 बजे कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई और करीब 12 बजे सुनवाई पूरी हो गई। यह भी माना जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की राष्ट्रपति शासन को चुनौती देने वाली याचिका पर पीठ फैसला आज सुरक्षित कर सकती है।

हाईकोर्ट ने बुधवार को तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि असीमित शक्ति किसी को भी भ्रष्ट कर सकती है फिर चाहे वह राष्ट्रपति ही क्यों न हों। राष्ट्रपति के निर्णय की भी समीक्षा हो सकती है, वह कोई राजा नहीं हैं। उनके फैसले भी गलत हो सकते हैं।वहीं, हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को भी इशारों में चेता दिया था।

हाईकोर्ट ने कहा था कि हमें उम्मीद है कि राष्ट्रपति शासन को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा न होने तक केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासन हटाकर कोर्ट को उकसाने का काम नहीं करेगी।

मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने बुधवार को राष्ट्रपति के संबंध में यह टिप्पणी तब की थी जब केंद्र सरकार की ओर से कहा गया था ‌कि राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 356 को लागू करने का फैसला अपने विवेक के आधार पर किया है।

इस पर पीठ ने कहा था ‌कि लोग गलत फैसले भी कर सकते हैं, चाहे वे राष्ट्रपति हों या फिर जज। राष्ट्रपति के समक्ष जो तथ्य पेश किए गए, उन्होंने उसके आधार पर फैसला लिया, लेकिन इसकी समीक्षा हो सकती है। हम साठ वर्ष पूर्व से बहुत आगे बढ़ चुके हैं ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिसकी समीक्षा न हो सके। राष्ट्रपति कितने ही उच्च पदस्थ हों, लेकिन कानून उनसे ऊपर है। कोर्ट का निर्णय देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा।

सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने आशंका जाहिर की थी कि अदालत का फैसला आने या रिजर्व किए जाने से पहले ही केंद्र सरकार उत्तराखंड से राष्ट्रपति शासन हटा सकती है। इस पर पीठ ने केंद्र को चेताते हुए कहा कि हमें उम्मीद है कि वे ऐसा करके हमें नहीं उकसाएंगे।

उत्तराखंड में क्यों नहीं दिया जा रहा बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका: HC

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