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लखनऊ अयोध्या में राम मंदिर निर्माण मामले को राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (आरएसएस) ने राम संतों की झोली में डाल दिया है। इस मामले में आरएसएस ने संतों के साथ रहने का संकल्प दोहराया है।

अवध प्रांत के संघचालक प्रभुनारायण और सह प्रांत कार्यवाह नरेन्द्र ने कहा मंदिर आंदोलन संतों का है। पहले भी इसे संघ ने नहीं चलाया। अगर संत मंदिर के लिए आंदोलन करेंगे तो संघ साथ देगा। विश्व संवाद केंद्र में कल प्रभुनारायण और नरेन्द्र पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

राम मंदिर निर्माण को लेकर अभी हाल ही में भाजपा सांसद विनय कटियार ने यह कहकर माहौल गर्मा दिया था कि लॉलीपाप नहीं बल्कि हमें मंदिर निर्माण चाहिए। इसके बाद से लगा कि संघ और भाजपा से जुड़ा एक वर्ग मंदिर निर्माण को लेकर आगे कोई पहल करेगा लेकिन इस बयान से यह साफ संकेत मिला है कि आरएसएस का रुख फिलहाल संतों पर ही निर्भर है। हालांकि, संघ चालक ने यह भी कहा कि राम मंदिर हमारी आस्था का विषय है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महोबा में बेटी बचाओ अभियान का जिक्र करते हुए कहा था कि ङ्क्षहदू अगर मां के गर्भ में बेटी मारेगा तो जेल जाना पड़ेगा। वैसे ही मुसलमान बहन को भी कोई फोन पर तीन तलाक नहीं बोल सकता। कल संघचालक ने भी एक सवाल पर कहा यह मसला मुस्लिम महिलाओं का है। संघ जेंडर के आधार पर भेद के खिलाफ है।

संघ इस मत का है कि मुस्लिम बहनों के साथ न्याय होना चाहिए। जोर देकर यह भी कहा कि धर्म के आधार पर भेद नहीं होना चाहिए। ध्यान रहे कि बसपा प्रमुख मायावती यह आरोप लगा चुकी हैं कि मोदी आरएसएस के एजेंडे पर काम कर रहे हैं।

प्रभुनारायण व नरेन्द्र ने बताया कि 23 से 25 अक्टूबर के बीच हैदराबाद के भाग्यनगर में आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में उत्तर प्रदेश के संगठन को लेकर चर्चा हुई। इसमें पहले प्रस्ताव में माक्र्ससवादी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा आरएसएस के 250 कार्यकर्ताओं की हत्या के विरोध में प्रस्ताव पारित कर उनकी हिंसा का विरोध किया गया। दूसरे प्रस्ताव में कहा गया कि पं. दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन के अनुसरण से ही वर्तमान चुनौतियों का समाधान संभव है।

 

आरएसएस ने संतों के साथ रहने का संकल्प दोहराया

| उत्तर प्रदेश, लखनऊ | 0 Comments
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