उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम घोषित होते ही एक फरवरी को पेश होने वाले आमबजट पर सियासी कोहराम की जमीन तैयार हो गई है। कांग्रेस समेत कई दल चुनाव से ठीक पहले आम बजट पेश करने पर आपत्ति जताते हुए राष्ट्रपति भवन का दरवाजा खटखटा चुके हैं।

अब खबर है कि विपक्ष चुनाव आयोग का रुख करने जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन के मुताबिक गुरुवार को विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग से मिलेंगी। चुनाव आयोग से मिलने वाली विपक्षी पार्टियों में TMC, BSP, JDU, RJD शामिल होंगी। हालांकि इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने विपक्ष की आम बजट की तारीख टालने संबंधी मांग पर विचार विमर्श के बाद फैसला लेने की बात कही थी।

वहीं भाजपा के साथ हर मुद्दे पर टकराव की भूमिका निभाने वाली शिवसेना ने अब एक फरवरी को संसद में पेश होने वाले बजट को लेकर खुला विरोध किया है। उद्धव ठाकरे ने बुधवार को कहा कि पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा हो चुकी है इसलिए चुनाव के दौरान संसद में आम बजट प्रस्ताव नहीं पेश किया जाना चाहिए, क्योंकि सत्ताधारी दल इसका फायदा ले सकते हैं।

इसलिए राष्ट्रपति से अपील है कि वे विशेषाधिकार का उपयोग करें। उद्धव ने कहा कि आम बजट प्रस्ताव में लोक लुभावन योजनाएं घोषित की जाती हैं। इससे  आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन होगा। इस तरह की योजनाएं बजट प्रस्ताव में घोषित होने से विपक्षी पार्टियों को चुनाव में नुकसान हो सकता है जबकि सत्ताधारी दल इसका फायदा उठा सकते हैं।

इसलिए जरूरी है कि केंद्रीय बजट पांच राज्यों के चुनाव संपन्न होने के बाद पेश किया जाए। महाराष्ट्र में अगले महीने होने वाले मुंबई सहित राज्य के 10 महानगरपालिका चुनाव और जिला परिषद चुनाव की तैयारी को लेकर उद्धव ने बांद्रा स्थित रंग शारदा में राज्य स्तरीय पार्टी पदाधिकारियों की बैठक बुलाई थी, जिसमें उन्होंने आम बजट प्रस्ताव का डटकर विरोध किया।

उन्होंने नोटबंदी को लेकर एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उद्धव ने सवाल किया कि इस नोटबंदी से आम जनता को तकलीफ के अलावा कुछ भी नसीब नहीं हुआ। 31 दिसंबर को पीएम मोदी ने गर्भवती महिलाओं के लिए 6000 रुपये देने की घोषणा की जबकि इसमें नया कुछ भी नहीं है। यह पुरानी योजना है।

उद्धव ने धर्म, जाति और भाषा के आधार पर वोट मांगने को गैरकानूनी करार दिए जाने पर कहा कि शिवसेना क्या कहती है इस पर पूरे देश की निगाह होती है। हम हिंदू धर्म के आधार पर वोट नहीं मांगते लेकिन जब हिंदू धर्म की रक्षा की नौबत आएगी तो हम उससे पीछे नहीं हटेंगे।

 

आम बजट की तारीख पर विपक्षी एक हुए

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