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रिजर्व बैंक ने मंगलवार को मौद्रिक नीति की समीक्षा प्रस्‍तुत की जिसमें गवर्नर रघुराम राजन ने ब्याज दरों से कोई छेड़छाड़ नहीं करते हुए इनमें कोई बदलाव नहीं किया है। रिजर्व बैंक के इस निर्णय के बाद रेपो रेट 6.5 प्रतिशत, रिवर्स रेपो 6 प्रतिशत, बैंक रेट 7 प्रतिशत और सीआरआर 4 प्रतिशत पर बनी रहेगी।

ब्‍याज दरों में कोई बदलाव नहीं होने के चलते हालांकि उपभोक्‍ताओं को ज्‍यादा ईएमआर्इ नहीं देना होगी लेकिन उन्‍हें किसी तरह का फायदा भी नहीं होगा। इससे पहले हुई समीक्षा में आरबीआई गवर्नर ने कहा भी था कि ब्‍याज दरों में बदलाव को लेकर निर्णय मानसून पर निर्भर करेगा।

महंगाई ने चौंकाया

रिजर्व बैंक के मुताबिक महंगाई दर के अप्रैल के आंकड़ों ने चौंकाया है। इससे भविष्य में महंगाई का अनुमान अनिश्चित है। सेंट्रल बैंक के मुताबिक कमोडिटी के दाम बढ़ने के कारण महंगाई में बढ़ोतरी आ रही है। रिजर्व बैंक ने जनवरी 2017 का महंगाई का लक्ष्य 5 फीसद पर बरकरार रखा है। रिजर्व बैंक ने 2016-17 के लिए जीडीपी का अनुमान 7.6 फीसद पर स्थिर रखा है। रिजर्व बैंक के मुताबिक मांग में कुछ बढ़ोतरी आ सकती है।

बाजार में तेजी

रिजर्व बैंक के दरों के ऐलान के बाद शेयर बाजार में तेजी देखी गई। पॉलिसी के ऐलान के बाद सेंसेक्स 100 अंक और निफ्टी 30 अंक की तेजी के साथ कारोबार कर रहा था।

ब्‍याज दरों से ज्‍यादा राजन के कार्यकाल पर थी नजर

मालूम हो कि इस बार पॉलिसी से ज्यादा राजन के कार्यकाल को बढ़ाने को लेकर चर्चा है। सबसे बड़ा सवाल है कि आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन को क्या सेवा विस्तार मिलेगा? इस पर सस्पेंस कायम है। भाजपा के अंदर से कई आवाजें उनके खिलाफ उठी हैं। खासतौर से सुब्रमण्यम स्वामी ये आरोप लगाते रहे हैं कि राजन की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था का बेड़ा गर्क हो जाएगा। लेकिन ये खबरें आ रही हैं कि पीएम मोदी का भरोसा जीतने में राजन कामयाब रहे हैं।

राजन को हटाने की मुहिम दिसंबर 2014 में ही शुरू हो गई थी। जब वित्त मंत्रालय के अधिकारी इस बात से खफा थे आरबीआई के गवर्नर ब्याज दरों का कम करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ भाजपा के कई सांसद भी उनके रवैये से हैरान और नाराज थे।

इन सब के बीच पीएम ने वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई और साफ कर दिया कि इस मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर बयानबाजी बंद होनी चाहिए। बताया जाता है कि उस बैठक के बाद राजन और पीएम के बीच एक बेहतर संबंध स्थापित हुआ। इस तरह के संकेतों से ये अनुमान लगाया जा रहा है कि सितंबर में समाप्त हो रहे राजन के कार्यकाल को एक और मौका मिल सकता है।

पूर्व वित्त सचिव अरविंद मायाराम का कहना है कि अगर राजन को दूसरे कार्यकाल के लिए हरी झंडी मिलती है तो वे सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेंगे। मायाराम के मुताबिक भारत की 2 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था को राजन अच्छी तरह से समझते हैं। सरकार के शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि राजन के दूसरे कार्यकाल के बारे में पीएम ही फैसला करेंगे।

हाल ही में द वॉल स्ट्रीट जर्नल के दिए गए साक्षात्कार में पीएम ने कहा था कि आरबीआई गवर्नर का कार्यकाल सितंबर में पूरा हो रहा है। दूसरी अवधि के लिए उस वक्त फैसला किया जाएगा। अधिकारियों ने नाम न बताने के शर्त पर कहा कि राजन की कार्यप्रणाली से पीएम खुश हैं। उनके खिलाफ चलाए जा रहे किसी भी अभियान का उन पर असर नहीं होगा। हालांकि इस मुद्दे पर न तो पीएमओ न ही वित्त मंत्रालय या राजन की तरफ से किसी तरह की टिप्पणी आयी है।

आम जनता को नहीं मिली राहत, ब्‍याज दरें रहेंगी यथावत

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