flood_21_08_2016

नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ की वजह से हालात बेहद खराब हैं। मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और बिहार में भारी बारिश और बाढ़ से हालात बेहद खराब हैं। बाढ़ से बिहार की राजधानी पटना में रविवार को राहत की स्थिति रही। लेकिन बाकी आठ बाढ़ प्रभावित जिलों में आफत बरकरार रही। राज्य में कमोबेश चार चार लाख लोग बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं।

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद और बलिया में हालात ज्यादा बिगड़ गए हैं। इन दोनों शहरों के नए इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल के मालदा में भी गंगा के रौद्ररूप से तबाही है। लगातार बारिश के कारण मध्य प्रदेश के रीवा, निमाड़ और मंदसौर में जनजीवन अस्तव्यस्त है।

बिहार में बाढ़ के हालात की समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना को सुरक्षित बताते हुए लोगों को बेफिक्र रहने की सलाह दी है। सोन का डिस्चार्ज गंगा में शनिवार को 11.62 लाख क्यूसेक था जो रविवार की दोपहर घटकर 3.60 लाख क्यूसेक हो गया। इस कारण पटना के घाटों पर गंगा के जलस्तर में थोड़ी कमी आई। सोन में आने वाले उफान की संभावना के मद्देनजर पटना समेत बक्सर, भोजपुर, वैशाली, सारण, बेगूसराय, समस्तीपुर, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर व कटिहार में हाईअलर्ट जारी कर दिया गया है। इस बीच दो दिनों में बाढ़ से सात लोगों की मौत हो चुकी है। बाढ़ग्रस्त इलाकों में सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।

हाजीपुर में 15000 लोग शिविरों में

गंगा में उफान के कारण आरा-बक्सर मार्ग पर आवागमन ठप है। छपरा-सोनपुर व छपरा-मांझी मार्ग पर सात फीट पानी बह रहा है। हाजीपुर में 15 हजार लोगों ने राहत कैंप व ऊंचे स्थानों पर शरण ले रखी है। बेगूसराय में बछवाड़ा प्रखंड में रिग बांध टूट गया है। इससे दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया है।

मुंगेर शहर में घुसा पानी

भागलपुर में गंगा खतरे के निशान से 61 सेमी ऊपर बह रही है। खगड़िया, मुंगेर, कटिहार, भागलपुर और लखीसराय में पानी की भयावहता दिख रही है। जमीन पर राहत और बचाव कार्य नहीं दिख रहा है। रविवार को मुंगेर के शहरी इलाकों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। दो दिनों में राज्यभर में बाढ़ में फंसे अब तक 15 हजार लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। झारखंड के पलामू और गढ़वा जिले में सोन का जलस्तर नीचे खिसकने से स्थानीय नागरिकों ने राहत की सांस ली है।

ढह गया पूरा गांव

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में कालियाचक के बाद अब मानिकचक इलाके में गंगा नदी का कटाव तेजी से शुरू हो गया है। रविवार को नदी कटाव में मानिकचक का ढोराईटोला गांव पूरी तरह से ढह गया। इसके अलावा कालियाचक 3 न. ब्लॉक के अंर्तगत कई इलाके भी गंगा कटाव से प्रभावित हो रहे हैं।

इलाहाबाद में 12 हजार बेघर

उत्तर प्रदेश के कई शहरों में बाढ़ से हालात और बिगड़ गए हैं। इलाहाबाद में अब तक 12 हजार से ज्यादा लोग बेघरबार हो गए हैं। उन्हें राहत शिविरों में ठहराया गया है। प्रशासन ने एनडीआरएफ की 35 टीमों की मांग की है। सेना पहले से ही सतर्क है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के मीरजापुर से लेकर बलिया तक बाढ़ का कहर जारी है। बलिया और गाजीपुर में एनडीआरएफ और जलपुलिस ने मोर्चा संभाल लिया है।

ठप रहा ट्रेनों का परिचालन

बलिया जिले में बाढ़ की स्थिति और भयावह हो गई है। एनडीआरएफ व फ्लड पीएसी के जवानों ने मोर्चा संभाल लिया है। गंगा हाई डेंजर लेबल से ऊपर बह रही है। दूबे छपरा रिंग बांध पर पानी का दबाव बना हुआ है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए छपरा-बलिया के बीच रात 11 बजे से सुबह आठ बजे तक रेल परिचालन ठप था। एनएच 31 पर भी पानी का दबाव बना हुआ है।

रीवा के 13 गांव बने टापू

मध्य प्रदेश में रीवा जिले के त्योंथर व जवा तहसील में बाढ़ के हालात बने हुए हैं। टमस नदी खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। यहां 13 गांव टापू बन गए हैं। 32 गांव का संपर्क त्योंथर मुख्यालय से टूटा हुआ है। प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और स्थानीय मंत्री राजेंद्र शुक्ल का पद्मधर कॉलोनी में विरोध हुआ।

इसके बाद सीएम अमानगंज पन्ना के लिए रवाना हो गए। मालवा के निमाड़ अंचल में दो दिन हुई बारिश आफत बनकर आई। मंदसौर में शिवना नदी 25 घंटे से भी अधिक समय तक उफान पर रही। 22 साल बाद श्री पशुपतिनाथ महादेव का गर्भगृह पूरा डूब गया।

फरक्का बांध हटाएं, इसी से बिहार में बाढ़ : नीतीश

गंगा में आई बाढ़ पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फिर फरक्का बांध पर नए सिरे से विचार करने का मुद्दा उठाया है। नीतीश ने कहा कि जब तक फरक्का में बांध है बिहार को बाढ़ की मार से कोई नहीं बचा सकता। उन्होंने कहा कि फरक्का बांध को हटाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक आज बिहार में गंगा की जो स्थिति है, वह फरक्का की वजह से है। सिल्ट के कारण बिहार में गंगा उथली हो गई है। सिल्ट का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह होगी।

आफत की बारिश: 4 लाख लोग प्रभावित, हजारों बेघर

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