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भोपाल। पीएम मोदी की बहुप्रचारित सांसद आदर्श ग्राम योजना केवल हवाहवाई साबित हो रही है। सासंद आदर्श ग्राम योजना को दो साल से ज्यादा का समय हो गया है लेकिन हालत जस की तस हैं। आज हम आपको कुछ वीआईपी सांसदों के गोद लिए गांवों का हाल बताएंगे। इन गांवों की हालत यह है कि गांव के लोग भी आदर्श ग्राम के तमगे को सुनकर नाराज हो जाते हैं। योजना के क्रियान्वयन में सांसदों की उदासीनता के चलते अधिकारी भी ज्यादा रुचि नहीं ले रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के गोद लिए गांव की हालत भी बदतर है। आपको बता दें जावड़ेकर ने सतना जिले के चित्रकूट से लगे पालदेव गांव को सांसद आदर्स ग्राम योजना के तहत गोद लिया था। पहले दिन केंद्रीय मंत्री, नेताओं और अफसरों के वाहनों का काफिला देखकर गांव के लोगों ने सोचा कि अब उनके अच्छे दिन आने वाले हैं। गांव के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छ जल, कच्ची सड़क, नालियों की समस्याओं से निजात मिल जाएगी लेकिन इतना लंबा समय गुजर जाने का बाद भी हालत वहीं की वहीं हैं। गांव की सड़कें कीचड़ से भरी पड़ी हैं। गांव के बीमार व्यक्ति को अपने इलाज के लिए तीस किलोमीटर का सफर तय कर मझगवां जाना पड़ता है। हालांकि आदर्श ग्राम घोषित होने के बाद 25 लाख रुपए साफसफाई के लिए खर्च किए गए हैं। कच्ची सड़कों के किनारे नालियां बनाई गईं, जो अब मिट्टी से पटी पड़ी हैं। मुख्य सड़क पर 400 मीटर का डामरीकरण कराया गया था, जो पहली बारिश में ही बह गया।

इसी प्रकार की हालातें कांग्रेस के सीनियर नेता कमलनाथ द्वारा चयनित बीसापुर गांव की हैं जहां ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं बी नहीं मिल पा रही हैं। बारिश से पूरा गांव बेहाल है। हालांकि दर्जनभर सड़कों का निर्माण कार्य शुरु हुआ है लेकिन यह भी कब तक पूरा होगा कहा नहीं जा सकता। कमलनाथ छिंदवाड़ा से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं। हालांकि सांसद के प्रयास से यहां एक निजी बैंक की शाखा जरूर खुली है। एक शाखा पहले से ही थी। ग्रामीणों भी इस बात से हैरानगी जता रहे हैं कि कागजों में उनके गांव को आदर्श कहा जाता है।

ठीक यही हाल होशंगाबाद होशंगाबाद से बीजेपी के सांसद राव उदय प्रताप सिंह के द्वारा गोद लिए गांव सांगाखेड़ा के शूल ग्रामीणों का है जहां ग्रामीण बता रहे हैं कि उनके यहां कुछ भी नहीं बदला है। सुविधाओं के बजाय समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। आदर्श गांव का निवासी कहे जाने पर वे कुछ अंदाज में नाराज होते हैं इस तरह का मजाक बहुत दिनों से हो रहा है। बारिश में पाइपलाइन से कीचड़युक्त पानी घरों में पहुंच रहा है। गांव के कच्चे रास्तों पर गर्मी में धूल तो बारिश में दलदल रहता है। बरौदा सागर भी बेहाल कुछ ऐसे ही हालात सागर से भाजपा सांसद लक्ष्मीनारायण यादव के चयनित गांव बरौदा सागर के हैं। बारिश के दौरान घुटनों तक पानी में चलकर गांव में प्रवेश करना पड़ता है। गांव में बिछी पाइपलाइन कई जगह जमीन से बाहर निकल आई है। कनेक्शन भी आधे घरों में हैं। आधा गांव पानी सिर पर ढोता है। ग्रामीणों कहते हैं कि यदि आदर्श गांव ऐसा बनता है तो अब किसी दूसरे गांव का चयन करें।

सांसद आदर्श ग्राम की धीमी चल रही चाल को लेकर किए गए सवालों पर होशंगाबाद के सांसद राव उदय प्रताप सिंह का कहना हैकई योजनाओं में विकास कार्य स्वीकृत हो रहे हैं। जल्द ही काम शुरु होंगे। आदर्श गांव के लिए पांच साल का समय है।वहीं सागर के सांसद लक्ष्मीनारायण यादव ने कहा, “यह सही है कि बरौदा सागर में तय समय सीमा में कुछ काम नहीं हो सके हैं। हालांकि स्कूल भवन, पेयजल की व्यवस्था जैसे कई काम हुए हैं। बाकी सभी काम भी करा रहे हैं।

आदर्श गांव कहने पर नाराज हो जाते हैं गांव वाले

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