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बसपा सुप्रीमो मायावती ने 2017 के चुनाव के लिए बिगुल बजाते हुए दलितों को मुकाबला करने की नसीहत दी और विपक्षियों पर जोरदार हमले किए।

पूर्व मुख्यमंत्री गुरुवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर बसपा के ‘विशेष श्रद्धा-सुमन अर्पित कार्यक्रम’ में बोल रही थीं।

उन्होंने हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला को अब तक न्याय न मिलने के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया और दलितों से अपील की कि वे कठिनाइयों से परेशान होकर आत्महत्या न करें, मुकाबला करें।

अंबेडकर ने तमाम अवरोध झेले, इस्तीफा तक देना पड़ा लेकिन आत्महत्या नहीं की। उन्होंने कहा,जेएनयू के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार रोहित वेमुला को आदर्श मानता है। पर, लोगों को पता होना चाहिए कि वह बिहार का भूमिहार है और कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़ा है। कम्युनिस्ट की सोच डॉ. अंबेडकर से अलग है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दलित वोटों के लिए अंबेडकर और दलित प्रेम का नाटक करने का आरोप लगाया। कहा कि मोदी की कथनी और करनी में अंतर है। दो साल की सरकार में हर ओर से निराश किया है। हमारे विरोधी मजबूरी में डॉ. अंबेडकर की जयंती मना रहे हैं।

मायावती ने श्रद्धांजलि सभा में मोदी पर तीखे वार किए। 73 मिनट के भाषण में आधे से ज्यादा वक्त मोदी पर हमले में बिताए। कहा, मोदी नाम के अंबेडकरवादी हैं। उन्होंने दलित वोटों के स्वार्थ में अंबेडकर की 125 वीं जयंती मनाने की घोषणा की।

कुछ छोटे-छोटे स्मारक, संग्रहालय बनाने का एलान किया। पर, उनसे जुड़े लोग जब आरक्षण सुविधाओं को खत्म करने के लिए समीक्षा की बात करते हैं तो वे कोई कार्रवाई नहीं करते। केंद्र व भाजपा शासित राज्यों में दलितों के उत्पीड़न पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

दलित विरोधी बयान देने वाले मंत्री वीके सिंह के खिलाफ कुछ नहीं किया। ऐसे में भाजपा यदि इस गलतफहमी में है कि स्मारक, संग्रहालय बनाने से दलितों का वोट ले लेंगे तो गलत है। कहा कि भाजपा कांग्रेस के दलित विरोधी पदचिह्नों पर चल रही है।

मायावती ने प्रधानमंत्री पर चुनावी वादे न निभाने व धन्नासेठों, पूंजीपतियों के समर्थन वाले काम करने का आरोप लगाया।

कहा, मोदी ने सत्ता में आने के 100 दिन के भीतर कालाधन लाकर 15-20 लाख रुपये हर गरीब के खाते में डालने का वादा किया था। वह वादा तो निभाया नहीं, कालाधन सफेद करने की व्यवस्था कर दी और पूंजीपतियों का 1.14 हजार करोड़ का कर्ज माफ कर दिया। दो-दो कमरे का पक्का मकान देने को कहा था। अब अगली सरकार में आने पर देने की बात कर रहे हैं।

मुंबई से अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन चलाने की बात करते हैं। इससे गरीबों को कोई फायदा नहीं होगा। फायदा धन्नासेठ पाएंगे। इतने पैसे में नई ट्रेनें चलाई जा सकती थीं और मनरेगा जैसी कई योजनाएं शुरू हो सकती थीं। मोदी ने चायवालों के लिए भी कुछ नहीं किया। उलटा, उनकी चाय फ्री में पीकर चले गए।

मायावती ने कहा, दलितों का कोई तीर्थ स्थान और कोई भगवान नहीं है। दलितों के असली भगवान, मंदिर व तीर्थस्थान अयोध्या, मथुरा वाराणसी, तिरुपति, द्वारका व केदारनाथ में नहीं हैं।

दलितों को किसी भगवान या देवी-देवता ने कुछ नहीं दिया। किसी तीर्थस्थान से कुछ नहीं मिला। उनके एक मात्र आराध्य अंबेडकर हैं। उन्हें जो कुछ मिला है, डॉ. अंबेडकर से मिला है।

मोदीकेशव पिछड़े लेकिन नहीं कर सकते भला
मायावती ने भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य के चयन पर भी सवाल उठाया। कहा कि एक तो उन पर गंभीर आपराधिक, सांप्रदायिक केस दर्ज हैं।

दूसरा, वे जाति से पिछड़े जरूर हैं लेकिन आरएसएस और भाजपा से जुड़े हैं। वह पिछड़ों का भला नहीं कर सकते। कल्याण सिंह भी पिछड़े थे लेकिन वह पिछड़ों का भला करने की जगह राम मंदिर की बात कर आरएसएस का एजेंडा लागू करने लगे। मोदी ने दो साल में पिछड़ों के लिए कोई ठोस काम नहीं किया।

2017 के विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंकते हुए मायावती ने कहा कि सपा सरकार को गुंडों, बदमाशों और माफिया की सरकार है। वह सत्ता में आएंगी तो सपा के जातिवादी व राजनीतिक द्वेष की भावना से लिए गए फैसलों को बदला जाएगा और सरकारी धन की लूट खसोट की जांच कराकर दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा,जब बसपा की सरकार थी तो गुंडे, बदमाश, माफिया और अराजकतत्व चूहे के बिलों में रहते थे। सपा राज में ये सभी खुलेआम घूम रहे हैं और लोगों का जीना दूभर हो गया है।

बीएसपी की सरकार बनी तो पहला काम गुंडों, बदमाशों और माफिया को जेल भेजना होगा। इसके लिए विशेष अभियान चलाएंगे। इस बार स्मारक व संग्रहालय नहीं बनवाने हैं, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों पर ही जोर रहेगा।

मायावती ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उस मुख्यमंत्री से लोककल्याण की क्या उम्मीद की जा सकती है जिसे विदेश भ्रमण, सैफई में मौजमस्ती के आयोजन और अफसरों से क्रिकेट खेलने से ही फुर्सत नहीं है। अफसर उन्हें मैच तो जिता सकते हैं लेकिन चुनाव नहीं।

मेट्रो, एक्सप्रेसवे के काम तो मैंने ही शुरू  किए
मायावती ने कहा कि सपा सरकार में लखनऊ मेट्रो और आगरा-लखनऊ  एक्सप्रेस- वे के जो थोड़े काम चल रहे हैं वह उनकी सरकार ने ही शुरू कर दिए थे। इस सरकार ने विकास के काम पर ध्यान ही नहीं दिया। 2012 में सपा के सत्ता में आने के बाद से ही अन्याय, अत्याचार, उत्पीड़न व गुंडई का राज है।

मायावती ने कहा है कि उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले के पीछे कांग्रेस है। यह याचिका दाखिल करने वाला कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुका है। कांग्रेस ने बीएसपी के मूवमेंट को रोकने की कोशिश में उनके खिलाफ मामला दाखिल करवाया है। वह ऐसे हथकंडों से डरने वाली नहीं हैं। वह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर खूब बरसीं।

उन्होंने कहा,कांग्रेस ने सीबीआई का दुरुपयोग कर उन्हें आय से अधिक संपत्ति मामले में फंसाया। सीबीआई के जरिये मामले को कई वर्षों तक लटकाए रखा। उन्हें सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिला। मगर, कांग्रेस फिर सक्रिय हुई।

उसने कांग्रेस के टिकट पर चरखारी से चुनाव लड़ने वाले कमलेश वर्मा से सुप्रीम कोर्ट में केस कराया। अब इसे सुनवाई के लिए दाखिल करवा दिया है। कमलेश को बसपा से चुनाव हारना पड़ा था।

कहा कि कांग्रेस और भाजपा, बसपा का मूवमेंट रोकने की कोशिश में तरह-तरह के हथकंडे अपनाते रहते हैं। ये मुझे कोर्ट-कचहरी में उलझाए रखना चाहते हैं। पर, हमें इससे परेशान नहीं होना है बल्कि मुकाबला करना है।

बसपा सुप्रीमो ने कहा,कांग्रेस हमेशा से ही अंबेडकर और दलित विरोधी पार्टी रही है। इस पार्टी ने डॉ. अंबेडकर के खिलाफ महाराष्ट्र में प्रत्याशी उतारा और संसद नहीं जाने दिया। उनकी काट में बाबू जगजीवन राम को आगे बढ़ाकर इस्तेमाल किया।

मगर, अब दलित वोटों की लालच में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी नागपुर जाकर अंबेडकर जयंती में शामिल हो रहे हैं।

इसी तरह जब केंद्र में यूपीए सरकार थी तब हैदराबाद यूनिवर्सिटी में आठ दलित छात्र आत्महत्या को मजबूर हुए। तब कांग्रेस का युवराज चुप रहा। सत्ता से बाहर होने पर गैर कांग्रेस शासित राज्यों में दलित उत्पीड़न पर पहुंच कर ये दलित प्रेम का दिखावा कर रहे हैं
राहुल की समझ पर उठाए सवाल
मायावती ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की समझ पर सवाल उठाए। कहा कि, राहुल ने रोहित वेमुला की डॉ. अंबेडकर से तुलना की। यह वैसे ही है जैसे गांधी और नेहरू से राहुल की तुलना की जाए। कहा कि राहुल को डॉ. अंबेडकर के बारे में समझ नहीं है। अंबेडकर की तुलना नेल्सन मंडेला और कांशीराम से ही की जा सकती है।।

‘आत्महत्या नहीं मुकाबला करें दलित’:माया

| उत्तर प्रदेश, लखनऊ | 0 Comments
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