women 25 08 2016

दिल्ली में महिलाएं घर से सड़क तक असुरक्षित हैं। गत 24 अगस्त को हाई कोर्ट ने भी दिल्ली में बढ़ते अपराध पर चिंता जताते हुए कहा था कि इसी वजह से दिल्ली से लोग पलायन कर रहे हैं।

दिल्ली पुलिस के आंकड़ों पर गौर करें तो 15 अगस्त 2016 तक राजधानी में हर दिन दुष्कर्म की छह, अपहरण की नौ, छेड़छाड़ की 12, घरेलू हिसा की 11 वारदात हुईं। पुलिस भले ही महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि 15 अगस्त 2016 तक महिलाओं के साथअपराध की 9898 रिपोर्ट दर्ज हो चुकी हैं।

महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की वारदात पांच साल में सात गुना तक बढ़ गई हैं। वर्ष 2012 में छेड़छाड़ की 727 रिपोर्ट दर्ज हुई थीं, जबकि वर्ष 2016 में 15 अगस्त तक 2725 मामले दर्ज हो चुके हैं। महिलाओं को बहला-फुसलाकर ले जाने की भी 324 रिपोर्ट दर्ज की गईं। सात महीने के अंदर ही 100 महिलाओं की दहेज के लिए हत्या कर दी गई, जबकि पिछले वर्ष 2015 में पूरे वर्ष 122 मामले दर्ज हुए थे।

अपराध रोकने में पुलिस नाकाम

दिल्ली पुलिस ने वर्ष 2012 में वसंत विहार सामूहिक दुष्कर्म कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए ऑपरेशन निर्भीक, ऑपरेशन भरोसा, इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर, महिला हेल्प लाइन, हिम्मत ऐप, एक्शन एगेंस्ट इव-टीजर्स, थाना स्तरीय महिला सुरक्षा समिति जैसे कई कदम उठाए। इसके अलावा बसों से लेकर प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए, लेकिन इन सब के बावजूद महिला अपराध रोकने में दिल्ली पुलिस नाकाम रही है।

 

आज भी सड़क से घर तक असुरक्षित हैं महिलाएं

| उत्तर प्रदेश | 0 Comments
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