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इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) की 15वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भारत में उच्चशिक्षा में बदलाव पर जोर दिया।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारतीय उच्चशिक्षा प्रणाली को एक आधार पर बदलने के लिए अभूतपूर्व कल्पना, गुणवत्ता, संतुलन के साथ रिसर्च की आवश्यकता है। राष्ट्रपति ने वर्ल्ड रैंकिंग में भारतीय शिक्षण संस्थानों के काफी पीछे होने पर भी चिंता व्यक्त की। वहीं, उन्होंने आईएसबी को दूसरे शिक्षण संस्थानों के लिए एक रोल मॉडल बताया।

रविवार को आईएसबी के 15वें स्थापना दिवस पर बतौर मुख्यातिथि पहुंचे राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षण संस्थानों को दुनिया के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करने और शिक्षाविदें को प्रासंगिक अनुसंधान करने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ नए मानदंडों को स्थापित करने की आवश्यकता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि उन संस्थानों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है, जोकि ऐसा माहौल देने में विश्वास रखते हैं, जिसमें दुनिया के महत्वपूर्ण मुद्दों पर शोध करके मानदंड स्थापित किए जा सकें। वहीं, राष्ट्रपति ने संतोष जताते हुए कहा कि भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है।

देश में इस समय 731 यूनिवर्सिटी और 36 हजार से अधिक कॉलेज, आईआईटी और अन्य शिक्षण संस्थान हैं। लेकिन वर्ल्ड रैंकिंग के लिहाज से अब तक भारतीय शिक्षण केंद्रों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। राष्ट्रपति आईएसबी के छात्रों से रविवार को दूसरी बार मुखातिब हुए थे। इससे पहले अप्रैल में राष्ट्रपति भवन में आईएसबी के विद्यार्थियों और फैकल्टी से मिले थे।

इस मौके पर प्रदेश के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने आईएसबी प्रबंधन, फैकल्टी और विद्यार्थियों को 15वें स्थापना दिवस पर शुभकामनाएं दी। इस मौके पर राज्यपाल ने आईएसबी का विशेष आवरण के अलावा आईएसबी का डाक टिकट जारी किया। पहली डाक टिकट के अलावा आवरण की प्रथम प्रति राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भेंट की।

कम समय में विश्व रैंकिंग में बनाया स्थान: जावड़ेकर
केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने कहा कि आईएसबी ने अपने शुरुआती दौर से अब तक कई बुलंदियों को छुआ है और बहुत कम समय में विश्व रैंकिंग में अपना स्थान बनाया है। जावडे़कर ने कहा कि केंद्र सरकार की नई शिक्षा योजना पर तेजी से काम हो रहा है, इसमें निजी संस्थानों से भी सहयोग लिया जा रहा है। उन्होंने अपने संबोधन के अंत में कहा कि हम सभी की पहली, दूसरी और तीसरी प्राथमिकता शिक्षा में गुणवत्ता लाना है।

15 वर्षों से सेवाएं देने वाले 11 डीन सम्मानित
15 वर्षों से इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में बतौर डीन सेवाएं देने वाले 11 लोगों को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सम्मानित किया। इनके सम्मान के लिए ऑडिटोरियम के बाहर एक विशेष बैनर के साथ मंच सजाया गया था, जहां सम्मान के बाद सभी ने राष्ट्रपति के साथ फोटो सेशन कराया।

 

आईएसबी में राष्ट्रपति बोले, देश की उच्च शिक्षा में बदलाव लाने की जरूरत

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