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लखनऊ समाजवादी परिवार के महासंग्राम के तीनों अहम मुद्दई पार्टी मुख्यालय में एक मंच पर आए तो उनके पास थे उलाहने, आरोप, सफाई, संस्मरण और आंसू। तीनों ने एक-दूसरे पर आक्रोश निकाला। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बोलते-बोलते भावुक हो गए, शिवपाल ने बेटे और गंगाजल हाथ में लेकर सौगंध खाने की बात कही और मुलायम सिंह ने तो बिल्कुल साफ कर दिया कि अमर सिंह और शिवपाल उनके भाई हैं जिनका साथ वह नहीं छोड़ सकते। लेकिन उन्होंने अखिलेश और शिवपाल को गले मिलने को कहा तो अखिलेश ने पिता के साथ ही चाचा के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। कुछ देर को सब ठीक होता लगा, मगर एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के पीछे अमर सिंह का हाथ होने की बात अखिलेश ने कही तो माहौल बिगड़ा और फिर बिगड़ता ही गया। शिवपाल ने अखिलेश से माइक छीना तो हंगामा हो गया। जाहिर है, संधि वार्ता अपने अपेक्षित नतीजे पर नहीं पहुंच सकी

अखिलेश और शिवपाल द्वारा अपनी बात रखने के बाद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने कुछ यूं बात शुरू की-मैं, 13 साल की उम्र में पहली बार जेल गया। गलियों में लोहियाजी के पक्ष में नारे लग रहे थे। पुलिस की ऐसी लाठी चली कि पीठ सांप की तरह हो गई थी। आज जो उछल रहे हैं, पुलिस एक लाठी मार दे तो पता नहीं चलेगा। हम जानते हैं लड़ाई कितनी कठिन है। मैंने आपको बुलाया है। पार्टी के लिए बहुत मेहनत करनी है (अखिलेश के पक्ष में नारेबाजी होने लगी) तो बात रोककर कहा कि जो आलोचना नहीं सुन सकते, वे बाहर जाए। नारेबाजी अच्छी नहीं। नौजवानों को मैंने आगे किया। संकट के वक्त ज्यादा बोलने की जरूरत नहीं। सुनो अखिलेश, जो अपनी आलोचना नहीं सुन सकता, वो नेता नहीं बन सकता। मैं जानता हूं कि तुम आलोचना नहीं सुन पाते। कमजोरियों से लड़ने के बजाए हम आपस में लड़ रहे हैं।

कुछ नेता चापलूसी में लगे हैं। पद मिलते ही इनके दिमाग खराब हो गए। जुआरियों और शराबियों की मदद कर रहे हो। ये जो अखिलेश भैया, अखिलेश भैया कर रहे हैं, ये क्या जानें कि हमने कितनी लड़ाई लड़ी? जो आलोचना नहीं सुन सकता वो नेता नहीं हो सकता। तुम लोगों का दिमाग खराब हो गया है। अभी मैं थका नहीं हूं। ऐसा नहीं कि नौजवान हमारे साथ नहीं हैं। मैंने इशारा कर दिया तो खदेड़ दिए जाओगे। तुम लोग हवा में घूम रहे हो, जमीन के नेता नहीं हो। शिवपाल जनता के बीच का नेता है। न जाने कितने लोगों को हमने पार्टी के साथ जोड़ा है। पार्टी में तनातनी से आहत हूं। आज जो पार्टी में चल रहा है, उससे दुखी हूं मगर मैं अभी कमजोर नहीं हुआ हूं। अपराधियों को पार्टी में नहीं आने दूंगा।

मुख्तार अंसारी का परिवार सम्मानित परिवार है। अमर सिंह ने कई बार मुझे बचाया। अमर मेरे भाई हैं। अमर और शिवपाल के खिलाफ कुछ नहीं सुन सकता। (नारेबाजी कर रहे युवकों की ओर मुखातिब होकर बोले)-चुप हो, सुनो या निकल जाओ यहां से। तुम्हारी क्या हैसियत है? अमर सिंह को बाहर करने को कह रहे हो? अमर को गाली देते हो। अमर सिंह ने मुझे जेल जाने से बचाया। मुझे सजा हो सकती थी। बीमार हुआ तो देखने मेदांता भी आए। अहसान फरामोश मत बनों। वह (रामगोपाल) मुंबई से बैठकर पत्र लिख रहा है। लिखाई-पढ़ाई का काम दे दिया तो न जाने क्या समझने लगा। परिवार को लड़ा रहा है। पांच वोट की हैसियत नहीं उसकी। पांच लोग साथ नहीं हैं। संघर्ष क्या जानते हैं। मैंने 29 महीने जेल काटी। मेरी मां हाथ में हंसिया और एक बगल में शिवपाल को पकड़े हुए पोटली में खाना लेकर आती थी, तब मैं दौड़कर शिवपाल को गोद में उठा लेता था, बड़ा संघर्ष किया है हमने और शिवपाल ने।

मैं, पार्टी कार्यालय में मीटिंग कर रहा था, आपने मुझे हटाकर अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। तब क्या मेरा कोई कसूर था। अखिलेश के प्रदेश अध्यक्ष बनने पर एयरपोर्ट जाकर मैने उनका स्वागत किया। आपके आदेश पर मेरे साथ क्या हुआ, मुझे क्यों हटा दिया गया। तुरंत मुझसे विभाग छीन लिए गए। क्या हमने कम काम किया था? मैंने मुख्यमंत्री का कौन सा आदेश नहीं माना? मैंने हर आदेश मुख्यमंत्री जी और नेताजी का माना है। मुझसे क्या झगड़ा था? मुझे नहीं बुलाया जाता तब भी मैं जाकर मिलता था। मेरे एक बेटा है, मैं उसकी कसम खाकर कह रहा हूं कि मुख्यमंत्री ने मुझसे कहा था कि मैं, नया दल बनाऊंगा। किसी दल से समझौता कर चुनाव लड़ूंगा। नेताजी मैं गंगाजल उठाकर कह भी कह रहा हूं कि अखिलेश ने मुझसे नई पार्टी बनाने की बात कही। वह सामने हैं, पूछ लीजिए। नेता जी आप बाहरी शक्तियों से लड़ रहे थे। 2003 में सरकार कैसे बनी, अमर सिंह ने सहयोग दिया था।

हम मेहनत करने वाले लोग हैं। बाकी लोग मलाई चाटने वाले हैं। नेताजी की पार्टी में वही रहेगा जो ईमानदारी से काम करेगा। दलाली नहीं करेगा, जमीनों पर कब्जे नहीं होंगे, अवैध काम नहीं होंगे। मुख्तार अंसारी ने कभी पार्टी ज्वाइन नहीं की और ये लोग अफवाह फैला रहे हैं कि वह पार्टी में शामिल हो गये। तुम लोग अमर सिंह की चरणों की धूल भी नहीं हो। इस तरह के लोगों को पार्टी से निकाला जाना चाहिये। नेताजी आप मुझे छूट दे दीजिए, मैं सबको एक कर आपको सौंप दूंगा। राज्यसभा के चुनाव में मैंने नेताजी के कहने से अजित सिंह से बात की थी। सीएम ने तो किसी से संपर्क भी नहीं किया। (इस बीच कुछ युवकों ने हूटिंग की कि अब तो हेलीकॉप्टर भी छिन गया) बात को रोक कर शिवपाल ने गुस्से में कहा-हेलीकॉप्टर क्या तुम्हारे बाप का था, जिससे हम लोगों से मिलने गए? फिर बात बढ़ाई नेताजी, जब आप निकलेंगे तो उत्तर प्रदेश में तूफान आ जाएगा। मैं इसलिए बताना चाहता हूं कि ये सरकार और सरकार में जो मंत्री होता है उसकी सामूहिक जिम्मेदारी होती है। पहले पढ़ो, सीखो और अनुशासन में रहना सीखो। जो पक्के सपावादी हैं उन्हें पांच नवंबर के सम्मेलन में आना है।

आंसू छलके, गला भर्राया मगर गुबार नहीं निकला

| उत्तर प्रदेश, लखनऊ | 0 Comments
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