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2 जून को फहरा गए देश के दूसरे सबसे बड़े तिरंगे को आंधी-तूफान से खासा नुकसान पहुंचा। इसके बाद प्रशासन ने तुरंत ही इसे हटा दिया। ऐसा राष्ट्रीय ध्वज नियम के मुताबिक किया गया। जिसके तहत अगर तिरंगे में किसी भी तरह की क्षति पहुंचती है तो इसे फहराना नहीं चाहिए।

मामला हैदराबाद का है जहां 2 जून को तेलंगाना सरकार ने देश के दूसरे सबसे ऊंचे तिरंगे को फहराया। तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने हैदराबाद के संजीवैया पार्क में तेलंगाना स्थापना दिवस के मौके पर ध्वजारोहण किया। ये तिरंगा रांची में फहराए गए देश के सबसे ऊंचे तिरंगे (293 फीट) से 2 फीट छोटा है। हालांकि ये दक्षिण भारत का सबसे ऊंचा तिरंगा है।

हालांकि तेज हवा से झंडे को नुकसान पहुंचा। जिसके बाद अधिकारियों ने इसे तुरंत ही बदल दिया। इस बीच तिरंगे को नुकसान पहुंचने और बदलने को लेकर आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गया है।

जानकार तिरंगे के आकार और इसके पोल की ऊंचाई को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। फिलहाल विवाद गहराने पर तेलंगाना सरकार ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। जिससे साफ हो सके आखिर झंडे को नुकसान कैसे पहुंचा?

इस झंडे की खूबियों पर गौर करें तो इसके पोल की ऊंचाई 291 फीट है। हालांकि सरकार की योजना पोल की ऊंचाई करीब 303 फीट (92 मीटर) करने की थी। लेकिन एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इसकी ऊंचाई को लेकर आपत्ति जताई। जिसके बाद इसे घटाकर 291 फीट तक कर दिया गया।

यह झंडा छत्तीसगढ़ के रायपुर में लगे 81 मीटर झंडे से 11 मीटर ज्यादा ऊंचा है। वहीं तिरंगे झंडे की बात करें तो इसकी लंबाई 72 फीट, जबकि चौड़ाई 108 फीट है।

झंडे का पोल कोलकाता की एक कंपनी ने बनाया है। इसकी कीमत 1.3 करोड़ रुपए बताई गई। इसे 40 फीट लंबे आठ ट्रकों में कोलकाता से हैदराबाद लाया गया था। इसके हिस्सों को हैदराबाद लाने में एक हफ्ते का समय लगा था।

आंधी से खराब हुई देश के सबसे ऊंचे झंडे की हालत

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