दक्षिण चीन सागर पर दावा खारिज होने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या अरुणाचल प्रदेश सीमा विवाद में भी चीन कमजोर पड़ेगा? चीन को करीब से जानने वाले भारतीय विशेषज्ञ तो यही मान रहे हैं।चीन अरुणाचल प्रदेश की सीमा को लेकर भारत से हमेशा विवाद करता रहा है। खासतौर पर तवांग पर उसने कई बार अपना दावा ठोंका है।

चीन की नीतियों के जानकार क्वाउडे आरपी के मुताबिक, पहली बार किसी सीमा विवाद में चीन को मुंह की खाना पड़ी है। इसका साफ असर अरुणाचल प्रदेश से जुड़े सीमा विवाद पर भी पड़ेगा। यह भारत के लिए बहुत अहम है।

वहीं जेएनयू में चीनी शिक्षा के विशेषज्ञ श्रीकांत कोंदापल्ली का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश पर चीन का कोई ऐतिहासिक दावा नहीं है। भारत ने चीन की बातों को कभी इस लिहाज से तवज्जो नहीं दी है।वहीं कुछ अन्य का मानना है कि अरुणाचल में चीन की हरकतें भले ही कम नहीं हों, लेकिन साउथ चाइना सी पर इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल के फैसले को आधार बनाते हुए अन्य देश भी अपने दावे ठोंकेगें।

 

मालूम हो, दक्षिण चीन सागर पर अध‍िकार को लेकर इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल (हेग ट्रिब्यूनल) ने पिछले हफ्ते अपने आदेश में कहा कि दक्षिण चीन सागर पर चीन का कोई ऐतिहासिक अध‍िकार नहीं है। हालांकि, चीन ने इस फैसले को खारिज कर दिया है।

अरुणाचल में भी कमजोर पड़ेगा चीन का दावा

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